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View Full Version : महान शायरों के चंद शेर



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Sheena
20-07-2011, 06:55 AM
अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!

Sheena
20-07-2011, 06:58 AM
ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं,

वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं |

Sheena
20-07-2011, 06:59 AM
कोई अच्छी सी सज़ा दो मुझको,
चलो ऐसा करो भूला दो मुझको,

तुमसे बिछडु तो मौत आ जाये
दिल की गहराई से ऐसी दुआ दो मुझको |

Sheena
20-07-2011, 06:59 AM
गुनाह करके सज़ा से डरते हैं,
जहर पी के दवा से डरते हैं,

दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं,
हम तो दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं |

Sheena
20-07-2011, 07:00 AM
जिंदगी देने वाले , मरता छोड़ गये,
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,

जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की,
वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये|

Teach Guru
20-07-2011, 07:12 AM
Sheena आपके लिए खास -:

गये दिनों का सुराग लेकर किधर से आया किधर गया वो,
अजीब मानुस अजनबी था , हमें तो हैरान कर गया वो,
वो हिज्र की रात का सितारा ,वो हमनफस हमसुखन हमारा,
सदा रहे जिसका नाम प्यारा ,सुना है कल रात शहर छोड़ ये वो|

badboy123455
20-07-2011, 11:45 AM
सागर को छुआ तो लहरों की याद आई !
आसमान को छुआ तो तारों की याद आई !!
काँटों को छुआ तो फूलों की याद आई !
अपने दिल को छुआ तो सिर्फ आपकी याद आई !!

badboy123455
20-07-2011, 11:48 AM
वो मेरी चाहत को यूँ आजमाते रहे !
गैरों से मिल के दिल को जलाते रहे !!
मेरी मौत के बाद भी जालिम को न आया रहम !
ला कर फूल मेरे बाजू वाली कब्र पर चढ़ाते रहे !!

badboy123455
20-07-2011, 11:49 AM
नन्हें से दिल में अरमान कोई रखना !
दुनियाँ की भीड़ में पहचान कोई रखना !!
अच्छा नहीं लगता जब रहते हो उदाश..!
इन होठों पे सदा मुस्कान वही रखना !!

badboy123455
20-07-2011, 11:49 AM
न वफ़ा न दगा कर पाए !
न प्यार न खता कर पाए !!
मोहब्बत कर तो ली हमने उनसे !
पर कभी अपना हाल उनसे बया न कर पाए !!

badboy123455
20-07-2011, 11:50 AM
जिंदगी एक अभिलाषा हैं !
क्या गजब इसकी परिभाषा हैं !!
जिंदगी क्या हैं मत पूछो आए दोस्तों..!
सवर गई तो दुल्हन, बिखर गई तो तमाशा हैं !

badboy123455
20-07-2011, 11:51 AM
ऐसा वादा न करना जो निभा न सको !
उस से दिल मत लगाना जिसे अपना बना न सको !!
दोस्ती सब से करना मगर....!
उस एक को खुश रखना जिसके बिना आप मुस्कुरा न सको !!

badboy123455
20-07-2011, 11:52 AM
निकले कोई अगर दिल में बस जाने के बाद !
दर्द होता हैं उनसे बिछर जाने के बाद....!!
पास होता हैं जो उसकी कदर नहीं होती !
कमी महसूस होती हैं उसके दूर जाने के बाद !!

badboy123455
20-07-2011, 11:53 AM
तेरे दिल में मेरे लिए जगह न सही !
मुझे खुद से दूर तो न कर.....!!
मुझे जिनी हैं ये जिंदगी तेरे संग !
मुझे मरने के लिए मजबूर तो न कर !!

badboy123455
20-07-2011, 11:54 AM
कहाँ से लाऊ हुनर उनको मनाने का !
कोई जबाब नहीं था उनके रूठ जाने का !!
मोहब्बत में सजा मुझे ही मिलनी थी...!
क्योकि जुर्म मैंने किया हैं उनसे दिल लगाने का !!

badboy123455
20-07-2011, 11:54 AM
दोस्ती शायद जिंदगी होती हैं !
जो हर दिल में बसी होती हैं !!
वैसे तो जी लेते हैं हर कोई अकेले !
मगर फिर भी जरुरत आपकी हमें हमेशा होती हैं !!

badboy123455
20-07-2011, 11:55 AM
प्यार करे उसे कोई माफ नहीं करता !
कोई उनके साथ इंसाफ नहीं करता...!!
लोग प्यार को तो पाप कहते हैं !
पर कौन ऐसा हैं जो ये पाप नहीं करता !!

badboy123455
20-07-2011, 11:55 AM
हँस कर जीना दस्तूर हैं जिंदगी का !
एक यही खिस्सा मशहूर हैं जिंदगी का !!
बीते हुए पल कभी लौट के नहीं आते...!
यही सब से बरा कसूर हैं जिंदगी का !!

Sheena
20-07-2011, 12:24 PM
अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे
लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे
हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है
अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे

badboy123455
20-07-2011, 12:59 PM
पल - पल उनके साथ निभाते हम !
एक इशारे पर दुनियाँ छोर जाते हम !!
समंदर के बिच में फरेब किया उसने !
वो कहते तो किनारे पे ही डूब जाते हम !!

badboy123455
20-07-2011, 01:00 PM
अलविदा कह कर जब कोई आँखों से दूर होता हैं !
आँखें देखती हैं पर दिल मजबूर होता होता हैं !!
कोई कहे न कहे ज़ुबान से मगर....!
दिल में दर्द ज़रूर होता हैं !!

badboy123455
20-07-2011, 01:00 PM
आँसुओं के सागर में दिल डुबोते हुए !
सारी रात गुजर गई हमे रोते हुए !!
मज़ाक कैसा किया तक़दीर ने हमसे...!
उन्हें पा न सके उनके होते हुए !!

badboy123455
20-07-2011, 01:01 PM
प्यार करके उसका इंतज़ार पाया हैं !
तनहाई में भी उसे हर पल पाया हैं !!
मिल जाए खुदा तो पूछूँगा उनसे...!
क्या तुने हर बार मुझे ही आजमाया हैं !!

badboy123455
20-07-2011, 01:01 PM
नाराज़ हम से कभी होना मत !
मुस्कान अपनी कभी खोना मत !!
जीते हैं हम आपके मुस्कुराहट देख कर !
अगर हम मर भी जाए तो कभी रोना मत !!

badboy123455
20-07-2011, 01:05 PM
पिघलती हैं मोम रौशनी के लिए !
होती हैं मोहब्बत दिलवालों के लिए !!
जिंदगी फना हैं आपकी खुशियों के लिए !
कुर्बान हैं हर साँस आपकी जिंदगी के लिए !!

badboy123455
20-07-2011, 01:09 PM
अपनी बेबसी पर आज रोना आया हैं !
दूसरों को क्या मैंने खुद को आजमाया हैं !!
हर एक की तनहाई दूर की हैं मैंने...!
पर खुद को हर मोर पे तनहा पाया हैं !!

Sheena
21-07-2011, 05:46 AM
आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा

Sheena
21-07-2011, 05:50 AM
अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे

Teach Guru
21-07-2011, 05:58 AM
बहुत ही बढ़िया अंदाज में , परस्तुती दी है मित्रों|

Sheena
21-07-2011, 05:59 AM
रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ, फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

किस-किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ

Krish13
21-07-2011, 06:02 AM
काश दिल मे इतनी गहराई ना होती
छुपाने को दिल मे कोई बात ना होती
गर समझ जाता सामने वाला आपकी वफा को
तो दुनिया मे किसी के साथ तन्हाई ना होती॥

Sheena
21-07-2011, 06:11 AM
देख तो दिल कि जां से उठता है
ये धुआं सा कहाँ से उठता है
यूं उठे आह उस गली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है

Krish13
21-07-2011, 06:15 AM
उलझी रात को पाने की जिद ना करो
जो ना हो अपना उसे अपनाने की जिद ना करो !
इस समंदर मे तूफान बहुत आते है
इसके साहिल पर घर बनाने की जिद ना करो !!

Sheena
21-07-2011, 06:15 AM
बाज़ीचा-ए-अतफाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
इमां मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है क़लीसा मेरे आगे
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
ये देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे

Krish13
21-07-2011, 06:27 AM
किसी की उम्मीद मे वो ऐसे खोये थे
पलको से पता चला वो रात भर रोये थे !
धीमी सी आहट से उनके करीब जाना चाहा
जाने क्यो लगा वो हमेँ याद करते करते सोये थे !!

Sheena
21-07-2011, 06:29 AM
चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
रंग बदले किसी सूरत शब् -ए -तनहाई का

Sheena
21-07-2011, 06:30 AM
ये चमनज़ार, ये जमना का किनारा, ये महल
ये मुनक्*क़श दरोदीवार, ये मेहराब, ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा लेकर
हम ग़रीबों की मुहब्*बत का उड़ाया है मज़ाक़

Sheena
21-07-2011, 06:33 AM
इक यही सोज़-ए-निहाँ कुल मेरा सरमाया है
दोस्तों मैं किसे ये सोज़-ए-निहाँ नज़र करूं
कोइ क़ातिल सर-ए-मक़्तल नज़र आता ही नहीं
किस को दिल नज़र करूँ और किसे जाँ नज़र करूँ?

Krish13
21-07-2011, 06:35 AM
प्यार किया तो बदनाम हो गये
चर्चे हमारे सरेआम हो गये !
जालिम ने दिल भी उसी वक्त तोड़ा
जब हम उसके प्यार के गुलाम हो गये !!

Sheena
21-07-2011, 06:35 AM
तुम भी महबूब मेरे तुम भी हो दिलदार मेरे
आशना मुझ से मगर तुम भी नहीं तुम भी नहीं
ख़त्म है तुम पे मसीहानफ़सी चारागरी
महरम -ए-दर्द-ए-जिगर तुम भी नहीं तुम भी नहीं

Sheena
21-07-2011, 06:37 AM
अपनी लाश आप उठाना कोई आसान नहीं
दस्त-ओ-बाज़ू मेरे नाकारा हुए जाते हैं
जिन से हर दौर में चमकी है तुम्हारी दहलीज़
आज सजदे वही आवारा हुए जाते हैँ

Sheena
21-07-2011, 06:38 AM
दूर मंज़िल थी मगर ऐसी भी कुछ दूर न थी
लेके फिरती रही रास्ते ही में वहशत मुझ को
एक ज़ख़्म ऐसा न खाया के बहार आ जाती
दार तक लेके गया शौक़-ए-शहादत मुझ को

Sheena
21-07-2011, 06:40 AM
राह में टूट गये पाँव तो मालूम हुआ
जुज़ मेरे और मेरा रहनुमा कोई नहीं
एक के बाद ख़ुदा एक चला आता था
कह दिया अक़्ल ने तंग आके 'ख़ुदा कोई नहीं'

Krish13
21-07-2011, 06:44 AM
जो दगा दे उसे यार नही कहते
जो खुशी ना दे उसे बहार नही कहते !
बस एक बार धड़कता है दिल किसी के लिये
जो दोबारा हो उसे प्यार नही कहते !!

Sheena
21-07-2011, 06:45 AM
गझल के साझ उठाओ बडी उदास है रात
पयाम-ए-दिल सुनाओ बडी उदास है रात

किसी खंडहर में कहीं कुछ दिये हैं टूटे हुए
इन्हीं से काम चलाओ बडी उदास है रात

aawara
21-07-2011, 08:33 AM
कहने वाले दो मिसरों में सारा किस्सा कहते हैं
नाच नहीं जिनको आता वो आँगन टेढ़ा कहते हैं

aawara
21-07-2011, 08:37 AM
सियासत किस हुनर मंदी से सच्चाई छुपाती है
कि जैसे सिसकियों के ज़ख्म शहनाई छुपाती है

aawara
21-07-2011, 08:38 AM
खुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते
कोई तो है, जो हवाओं के पर कतरता है

badboy123455
21-07-2011, 10:18 AM
मेरे वजूद से लिपटी खुशबू तेरे नाम की हैं !
मेरी हर धड़कन तेरे नाम की हैं !!
इतना यकीन करले एय मेरे हम नाशी....!
बिन तेरे मेरी जिंदगी बेनाम सी हैं !

badboy123455
21-07-2011, 10:20 AM
आरजू में आपके दीवाना हो गए !
आपको दोस्त बनाते - बनाते बेगाना हो गए !!
करले एक बार याद इस नाचीज को....!
क्योकि हिचकियाँ आए ज़माना हो गए !!

badboy123455
21-07-2011, 10:21 AM
रिश्ता उल्फत का यूँ निभाया जाता हैं !
अश्क पि कर भी मुस्कुराया जाता हैं !!
ऐसे भी बोड़ आते हैं जिंदगी में....!
किसी के खातिर खुद को मिटाया जाता हैं !!

badboy123455
21-07-2011, 10:22 AM
हँसे हम ये किश्मत को गवारा नहीं !
कभी हमारे लिए चमके ऐसी कोई तारा नहीं !!
हर वक्त हम कुछ न कुछ खोते रहे...!
क्योकि हम वो पाना चाहते थे जो हमारा नहीं !!

badboy123455
21-07-2011, 10:24 AM
यादों में कभी आप भी खोए होंगे !
खुली आँखों से कभी आप भी सोए होंगे !!
माना हमें हैं आदत गम छुपाने की...!
पर हँसते हुए कभी आप भी रोए होंगे !!

Dark Rider
21-07-2011, 10:31 AM
आरजू में आपके दीवाना हो गए !
आपको दोस्त बनाते - बनाते बेगाना हो गए !!
करले एक बार याद इस नाचीज को....!
क्योकि हिचकियाँ आए ज़माना हो गए !!

काश आज ही आ जाए |

badboy123455
21-07-2011, 10:43 AM
उनके चेहरे पे इस कदर नूर था !
उनकी यादों में हमें रोना भी मंज़ूर था !!
बेवफ़ा भी नहीं उसे कह सकते.....!
प्यार तो हमने किया था, वो तो बेक़सूर था !!

badboy123455
21-07-2011, 10:45 AM
काश आज ही आ जाए |

आपके लिए तो संडे तक इंतजार कर रहा हू

badboy123455
21-07-2011, 10:45 AM
कुछ तो अपने बारे में बताओ !
एक बार तो सपने में आकर सताओ !!
आप जो रिश्ता चाहो बना लेंगे हम...!
कभी हक़ से आप अपना प्यार तो जताओ !!

Kamal Ji
21-07-2011, 10:46 AM
आरजू में आपके दीवाना हो गए !
आपको दोस्त बनाते - बनाते बेगाना हो गए !!
करले एक बार याद इस नाचीज को....!
क्योकि हिचकियाँ आए ज़माना हो गए !!


काश आज ही आ जाए |

आमीन..............................

badboy123455
21-07-2011, 10:46 AM
क्या करे जब किसी की याद आए !
हर धड़कन पे किसी का नाम आए !!
कैसे कटेगी ये लम्हे इंतज़ार के...!
उसके इश्क में हर घरी मेरी जान जाए !!

Rihan Hasan
21-07-2011, 03:27 PM
चंद सिक्कों में बिकता है यहाँ इंसान का ज़मीर,
कौन कहता है मेरे मुल्क में मंहगाई बहुत है...

Rihan Hasan
21-07-2011, 03:47 PM
हर वक़्त मेरी खोज में रहती है तेरी याद,
तूने तो मेरे वजूद की तन्हाई भी छीन ली....

aawara
21-07-2011, 08:40 PM
भारत में हिंदी ग़ज़लों के जनक कहे जाने वाले दुष्यन्त कुमार की ऍसी ही एक ग़ज़ल आपके सामने पेश कर रहा हूँ। ये ग़ज़ल हमें उत्प्रेरित करती है इस बात के लिए कि किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए, दूसरों की तरफ़ आशा भरी नज़रों से देखने के बजाए ख़ुद कुछ करने की ललक होनी चाहिए। दुष्यन्त जी ने इस ग़ज़ल के हर शेर में विभिन्न रूपकों की मदद से इस बात को पुरज़ोर ढंग से रखा है।

aawara
21-07-2011, 08:41 PM
आज सड़कों पर लिखे हैं सैंकड़ों नारे न देख
घर अँधेरा देख तू, आकाश के तारे न देख।

एक दरिया है यहाँ पर दूर तक फैला हुआ
आज अपने बाजुओं को देख पतवारें न देख।

अब यक़ीनन ठोस है धरती हक़ीक़त की तरह
यह हक़ीक़त देख, लेकिन ख़ौफ़ के मारे न देख

aawara
21-07-2011, 08:42 PM
वे सहारे भी नहीं अब, जंग लड़नी है तुझे
कट चुके जो हाथ, उन हाथों में तलवारें न देख।

दिल को बहला ले, इजाज़त है, मगर इतना न उड़
रोज़ सपने देख, लेकिन इस क़दर प्यारे न देख।

aawara
21-07-2011, 08:42 PM
ये धुँधलका है नज़र का, तू महज़ मायूस है
रोग़नों को देख, दीवारों में दीवारें न देख।

राख, कितनी राख है, चारों तरफ़ बिखरी हुई
राख में चिंगारियाँ ही देख, अँगारे न देख।

Sheena
22-07-2011, 06:44 AM
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

badboy123455
22-07-2011, 10:21 AM
चंद सिक्कों में बिकता है यहाँ इंसान का ज़मीर,
कौन कहता है मेरे मुल्क में मंहगाई बहुत है...

वाह मित्र क्या बात हे .............

fullmoon
22-07-2011, 11:56 AM
हर वक़्त मेरी खोज में रहती है तेरी याद,
तूने तो मेरे वजूद की तन्हाई भी छीन ली....


रिहान जी,

आपके शेरों के लिए तो एक ही लफ्ज़ बेसाख्ता जुबां पर आ जाता है....लाजवाब

काफी दिनों के बाद आपने फिर से इस सूत्र में वापसी की है.

अब गायब मत हो जाइएगा.

REPUTATION .......

fullmoon
22-07-2011, 12:05 PM
मेरे वजूद से लिपटी खुशबू तेरे नाम की हैं !
मेरी हर धड़कन तेरे नाम की हैं !!
इतना यकीन करले एय मेरे हम नाशी....!
बिन तेरे मेरी जिंदगी बेनाम सी हैं !


दोस्त,

आप तो इस सूत्र पर छा ही गए हो.

बड़े ही दर्द भरे शेर आप प्रस्तुत कर रहे हो.,जो पहली ही नज़र में गहराई तक सोचने को मजबूर कर देते हैं.

सारे शेर ही REPUTATION वाले हैं,

किस एक को QUOTE करूँ?

pathfinder
23-07-2011, 09:17 AM
हर वक़्त मेरी खोज में रहती है तेरी याद,
तूने तो मेरे वजूद की तन्हाई भी छीन ली....
बेहतरीन शेर के लिए धन्यवाद रेहान जी ....................

उफ़ ये यादों का तसलसुल ये ख्यालों का हुजूम
आपने छीन ली मुझसे मेरी तन्हाई भी |

तसलसुल-सिलसिला,निरंतरता
हुजूम-भीड़

badboy123455
23-07-2011, 11:16 AM
दोस्त,

आप तो इस सूत्र पर छा ही गए हो.

बड़े ही दर्द भरे शेर आप प्रस्तुत कर रहे हो.,जो पहली ही नज़र में गहराई तक सोचने को मजबूर कर देते हैं.

सारे शेर ही REPUTATION वाले हैं,

किस एक को QUOTE करूँ?

शायरी पसंद करने के लिए हार्दिक आभार मित्र

badboy123455
23-07-2011, 11:39 AM
किसी ने हमें आशिक कहा !
किसी ने हमें दीवाना कहा !!
इन आँखों में आँसू तब आए !
जब उन्होंने हमें बेगाना कहा !!

badboy123455
23-07-2011, 11:40 AM
जब भी करीब आता हूँ बताने के लिए !
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिए !!
महफिलों की शान न समझना मुझे...!
मैं तो हँसता हूँ गम छुपाने के लिए !!

badboy123455
23-07-2011, 11:40 AM
जो कहते थे तुम्हे भूल न पायेंगे !
मैंने उनके दरवाजे पर अपनी तस्वीर जली देखि !!

badboy123455
23-07-2011, 11:47 AM
आदत हैं तेरी याद आने की !
इन आँखों को तेरी एक झलक पाने की !!
हमारी तो तमन्ना हैं तुमको पाने की !
पर शायद तुम्हारी आदत हैं हमें तड़पाने की !!

badboy123455
23-07-2011, 11:49 AM
आदत हैं तेरी याद आने की !
इन आँखों को तेरी एक झलक पाने की !!
हमारी तो तमन्ना हैं तुमको पाने की !
पर शायद तुम्हारी आदत हैं हमें तड़पाने की !!

fullmoon
23-07-2011, 01:26 PM
जो कहते थे तुम्हे भूल न पायेंगे !
मैंने उनके दरवाजे पर अपनी तस्वीर जली देखि !!



दोस्त,

आपकी शायरी को पढ़ कर एक विचार आया है की क्यों नहीं आप २ नए सूत्र शुरू करते.

पहले सूत्र का नाम रखें...."मेरा पहला प्यार"

जिसमे सभी सदस्यों को अपने पहले प्यार को लिखने के लिए आमंत्रित करें.

इससे एक बहुत ही रूमानी सूत्र का निर्माण होगा.

और हम सभी सदस्यों को एक दूसरे की पहली लव स्टोरी पता चलेगी.

इसी प्रकार का सूत्र निकिता भारद्वाज जी ने पहले बनाया था जो की बाद में चौपाल में तब्दील कर दिया गया.

यकीन मानिए ,ये एक बहुत ही रोचक सूत्र होगा.

fullmoon
23-07-2011, 01:31 PM
और दूसरे सूत्र का नाम रखिये...."मेरा पहला BREAK UP '

ये भी एक भावुक सूत्र होगा,जिसमे के सभी सदस्य अपने उस अनुभव को बताएँगे,

जब की उनका दिल पहली बार प्यार में टूटा था,क्या थी वो कहानी?

वो क्या हालात थे,जब उनको अपना पहला प्यार नहीं मिल सका.

saam
23-07-2011, 01:49 PM
भाई क्यों लोगो के पुराने जख्म खुरेच रहे हो.

badboy123455
23-07-2011, 01:56 PM
वक्त की गर्दिश में बह जाने दो !
जिंदगी जैसे गुजरती हैं गुजर जाने दो !!
मेरे दिल ने कभी फूलों की तमन्ना की थी !
आज कांटे ही को दामन से लिपट जाने दो !!

saam
23-07-2011, 01:57 PM
उसकी हथेली पर अपना नाम देखकर बहोत खुशी हुई,
फिर उसने बड़े मासूम लहजे में कहा तेरे हम नाम और भी हे.

badboy123455
23-07-2011, 02:04 PM
दोस्त,

आपकी शायरी को पढ़ कर एक विचार आया है की क्यों नहीं आप २ नए सूत्र शुरू करते.

पहले सूत्र का नाम रखें...."मेरा पहला प्यार"

जिसमे सभी सदस्यों को अपने पहले प्यार को लिखने के लिए आमंत्रित करें.

इससे एक बहुत ही रूमानी सूत्र का निर्माण होगा.

और हम सभी सदस्यों को एक दूसरे की पहली लव स्टोरी पता चलेगी.

इसी प्रकार का सूत्र निकिता भारद्वाज जी ने पहले बनाया था जो की बाद में चौपाल में तब्दील कर दिया गया.

यकीन मानिए ,ये एक बहुत ही रोचक सूत्र होगा.

मित्र में तो आपके इस सूत्र का भी बहुत बड़ा प्रशंसक हू ,यकी माने इसकी अनेक शायरिया मेने सेव कर राखी हे जब भी मोका मिलता हे दोस्तों के बिच सुना देता हू और सूत्र निर्माण आप ही करे तो बेहतर होगा में उसमे सहयोग अवश्य करूँगा और फोरम पर यदि आप सूत्र बनायेगे तो सदस्यों का ध्यानाकर्षण भी होगा

badboy123455
23-07-2011, 02:08 PM
और दूसरे सूत्र का नाम रखिये...."मेरा पहला BREAK UP '

ये भी एक भावुक सूत्र होगा,जिसमे के सभी सदस्य अपने उस अनुभव को बताएँगे,

जब की उनका दिल पहली बार प्यार में टूटा था,क्या थी वो कहानी?

वो क्या हालात थे,जब उनको अपना पहला प्यार नहीं मिल सका.


हा हा हा पहला प्यार फिर ब्रेक उप मित्र दोनों का निर्माण आप ही करे वैसे भी प्यार हो ना हो ब्रेक अप कि कई कहानिया होगी [ क्यों ना दोनों सूत्रों का इक ही सूत्र में समवेश कर दे बाकी आप बताये

badboy123455
23-07-2011, 02:09 PM
भाई क्यों लोगो के पुराने जख्म खुरेच रहे हो.
मित्र यकी माने बहुत ही रोचक सूत्र होगा

badboy123455
23-07-2011, 02:10 PM
उसकी हथेली पर अपना नाम देखकर बहोत खुशी हुई,
फिर उसने बड़े मासूम लहजे में कहा तेरे हम नाम और भी हे.

वाह क्या बात हे .........

fullmoon
23-07-2011, 02:50 PM
हा हा हा पहला प्यार फिर ब्रेक उप मित्र दोनों का निर्माण आप ही करे वैसे भी प्यार हो ना हो ब्रेक अप कि कई कहानिया होगी [ क्यों ना दोनों सूत्रों का इक ही सूत्र में समवेश कर दे बाकी आप बताये


दोस्त,

इसे आप बनाएं.

क्योंकि मैं शुरू से ही एक पढ़ाकू लड़का रहा था,

इसलिए प्यार के लिए समय ही नहीं मिला तो ब्रेक up होता कैसे?

तब किताबें ही मेरा प्यार थी.

जब मैंने इन दोनों एहसास को जिया ही नहीं तो उस पर सूत्र कैसे बनाऊं?


(हाँ इस विषय पर कहानियां बहुत लिखी हैं मैंने)


वैसे दोनों सूत्रों को मिलाना भी ठीक रहेगा...."मेरा पहला प्यार" के नाम से.

Rihan Hasan
23-07-2011, 10:14 PM
वाह मित्र क्या बात हे .............
शुक्रिया मित्र आपकी शायरी भी लाजवाब है......



रिहान जी,

आपके शेरों के लिए तो एक ही लफ्ज़ बेसाख्ता जुबां पर आ जाता है....लाजवाब

काफी दिनों के बाद आपने फिर से इस सूत्र में वापसी की है.

अब गायब मत हो जाइएगा.

REPUTATION .......
जी बहुत बहुत आभार अब गायब नहीं होंगे.......


बेहतरीन शेर के लिए धन्यवाद रेहान जी ....................

उफ़ ये यादों का तसलसुल ये ख्यालों का हुजूम
आपने छीन ली मुझसे मेरी तन्हाई भी |

तसलसुल-सिलसिला,निरंतरता
हुजूम-भीड़
प्रशासक जी बहुत बहुत शुक्रिया आपको शेर पसंद आया मन अति प्रसन्न हुआ
धन्यवाद.......

Rihan Hasan
23-07-2011, 10:35 PM
निगाह-ए-इश्क को अजब ही मशगूल देखा,
उसे ही देखना चाहें जिसे बे-पनाह देखा....

Rihan Hasan
23-07-2011, 11:05 PM
तुझे सोचूँ तो पहलु से सरक जाता है दिल मेरा,
मैं दिल पे हाथ रख कर धडकनें तरतीब देता हूँ....

Rihan Hasan
24-07-2011, 12:33 AM
हाल पूछती नहीं दुनिया जिंदा लोगों का,
चले आते हैं ज़नाज़े पे बारात की तरह...

Ranveer
24-07-2011, 08:47 AM
शायद तू कभी प्यासा मेरी तरफ लौट आये
आँखों में लिए फिरता हूँ , दरिया तेरी खातिर

fullmoon
24-07-2011, 01:41 PM
जिंदगी जैसी तमन्ना थी, नहीं, कुछ कम है

हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है

अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है


शहरयार

fullmoon
24-07-2011, 01:45 PM
इस से पहले के बे-वफ़ा हो जाएं

क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं

तू भी हीरे से बन गया पत्थर

हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं


अहमद फ़राज़

fullmoon
24-07-2011, 01:53 PM
खातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

झूठी क़सम से आपका ईमान तो गया

दिल लेके मुफ़्त, कहते हैं कुछ काम का नहीं

उलटी शिकायतें रहीं, एहसान तो गया


दाग देहलवी

pathfinder
24-07-2011, 02:23 PM
मैं जब उसकी याद में खो सा जाता हूँ |
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे |

pathfinder
24-07-2011, 02:25 PM
शायद तू कभी प्यासा मेरी तरफ लौट आये
आँखों में लिए फिरता हूँ , दरिया तेरी खातिर

है मेरी प्यास की शिद्दत पे अगर शक तुझको
ला मेरे सामने बहता हुआ दरिया रख दे |

badboy123455
24-07-2011, 05:06 PM
हाल पूछती नहीं दुनिया जिंदा लोगों का,
चले आते हैं ज़नाज़े पे बारात की तरह...

रिहान जी गजब चीज पेश करते हो शानदार
वाह........

badboy123455
24-07-2011, 05:06 PM
इस से पहले के बे-वफ़ा हो जाएं

क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं

तू भी हीरे से बन गया पत्थर

हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं



अहमद फ़राज़



वाह मित्र .......
गहरी बात कह गए

Rajeev
24-07-2011, 05:50 PM
इस से पहले के बे-वफ़ा हो जाएं

क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं

तू भी हीरे से बन गया पत्थर

हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं


अहमद फ़राज़
वाह फूलमून जी बहुत अच्छी शायरी है दिल प्रसन्न हो गया एक अच्छे सूत्र के लिए रेपुटेशन स्वीकार करे |
धन्यवाद ............:group-dance:

Rihan Hasan
25-07-2011, 03:11 PM
खातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

झूठी क़सम से आपका ईमान तो गया

दिल लेके मुफ़्त, कहते हैं कुछ काम का नहीं

उलटी शिकायतें रहीं, एहसान तो गया



दाग देहलवी

बहुत खूब....
हाय अदब-ए-मोहब्बत के तक़ाज़े मोहसिन,
लब हिले और शिकायत ने दम तोड़ दिया....

Rihan Hasan
25-07-2011, 03:20 PM
मैं जब उसकी याद में खो सा जाता हूँ |
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे |

बहुत उम्दा कहा आपने.....
न जाने इतनी मोहब्बत कहाँ से आ गयी है उसके लिए,
के मेरा दिल भी उसकी खातिर मुझ से रूठ जाता है....

Teach Guru
26-07-2011, 12:36 AM
अति उतम मित्र बहुत बढ़िया है मनोरंजन से भरपूर, लगे रहो........

Rihan Hasan
26-07-2011, 11:15 AM
ये मरना, ये कफ़न, ये कब्र तो रश्म-ए-शरियत है "ग़ालिब"
मर तो तब ही गए थे जब हसरत-ए-इश्क दिल में जगी थी

Rihan Hasan
26-07-2011, 11:22 AM
यूँ जज़्ब कर लिया है तुझे रूह में के अब,
ए दोस्त तुझको पाने की हसरत नहीं रही....

sushilnkt
26-07-2011, 11:37 AM
आज बुहत मन हे की कुछ कर गुजरू में
लेकिन फिर सोचता हु आज नहीं
कल करे गे ...................

badboy123455
26-07-2011, 03:06 PM
कदम रुक से गये है फुल बिकते देखकर फराज


मै अक्सर उसे केहता था मुहब्बत फुल होती है

badboy123455
26-07-2011, 03:06 PM
कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को


न जाने कैसे खबर हो गई ज़माने को

badboy123455
26-07-2011, 03:07 PM
सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे


कहो तो आज सजा लूँ ग़रीबखाने को

badboy123455
26-07-2011, 03:08 PM
अब आगे इसमें तुम्हारा भी नाम आयेगा
जो हुक़्म हो तो यहीं छोड दूँ फ़साने को

badboy123455
26-07-2011, 03:08 PM
मुझे खैरात में मिली खुशीया अच्छी नही लगती फराज


मै अपने दुखोमे रेहता हू नवाबोकी तऱ्ह

badboy123455
26-07-2011, 03:09 PM
मै खुदाके नजरोमें कैसे न गुनेह्गार होता फराज


के अब तो सजदोमेभी वो याद आने लगे

badboy123455
26-07-2011, 03:10 PM
कुसूर नही इसमे कुछभी उनका फरज


हमारी चाहतही इतनी थी के उन्हे गुरुर आ गया

badboy123455
26-07-2011, 03:11 PM
वापसीका सफर अब मुमकिन न होगा फरज



हम निकल चुके है आखसे आसू कि तऱ्ह

badboy123455
26-07-2011, 03:12 PM
अपने मुक़द्दरमें लिखा तो मिल जायेगा ए खुदा......


मुझेको वोह चीज अदा कर जो मेरी किस्मत में ना हो......

badboy123455
26-07-2011, 03:12 PM
अपने सिवा बाताओ तुम्हे कूछ मिला है फरज


हजार बार ली है तुमने मेरे दिल कि तालाशीयां

fullmoon
26-07-2011, 09:10 PM
अपने मुक़द्दरमें लिखा तो मिल जायेगा ए खुदा......


मुझेको वोह चीज अदा कर जो मेरी किस्मत में ना हो......


बहुत ही खूबसूरत बात कही है,शायर ने.

एक उम्दा शेर के लिए आपको धन्यवाद.

Sheena
27-07-2011, 07:18 AM
जुनून-ए-शौक अब भी कम नहीं है
मगर वो आज भी बरहम नहीं है

बहुत मुश्किल है दुनिया का संवरना
तेरी जुल्फों के पेच-ओ-ख़म नहीं है

Sheena
27-07-2011, 07:19 AM
मैं चाहता भी यही था वो बेवफा निकले,
उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले

किताब ए माजी के औराक़ उलट के देख ज़रा,
ना जाने कोनसा सफा मुङा हुआ निकले

Sheena
27-07-2011, 07:20 AM
अपने हर हर लफ्ज़ का खुद आईना हो जाऊँगा ,
उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा

तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं,
मैं गिरा तो मसला बन कर खड़ा हो जाऊँगा

Sheena
27-07-2011, 07:21 AM
बर्बाद तमन्ना पे अताब और ज़्यादा
हाँ मेरी मोहब्बत का जबाव और ज्यादा


रोये ना अभी अहल-ए-नज़र हाल पे मेरे
होना है अभी मुझ को खराब और ज्यादा

Sheena
27-07-2011, 07:22 AM
चेहरा मेरा था निगाहें उसकी ,
खामुशी में भी वो बातें उसकी।

मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गयीं ,
शेर कहती हुई आँखे उसकी।

Sheena
27-07-2011, 07:23 AM
हमारी दास्ताँ शहरों की दीवारों पे चस्पां है,
हमें ढूंढेगी दुनिया कल पुराने इश्तहारों में.

Sheena
27-07-2011, 07:23 AM
हश्र के दिन मेरी चुप का माजरा,
कुछ न कुछ तुम से भी पूछा जाएगा।

Sheena
27-07-2011, 07:24 AM
जब आप जा ही रहे हैं तो तकल्लुफ़ कैसा,
ये जरुरी तो नहीं हाथ मिलाया जाए।

Sheena
27-07-2011, 07:27 AM
ईरादे बांधता हूँ , सोचता हूँ, तोड़ देता हूँ,
कहीं ऐसा ना हो जाए, कहीं वैसा ना हो जाए।

Sheena
27-07-2011, 07:28 AM
तुम मेरे लिये अब कोई इल्जाम ना ढूंढो ,
चाहा था इक तुम्हे यही इल्जाम बहुत है।

Sheena
27-07-2011, 07:28 AM
इक उमर कट गई है तेरे इंतजार में,
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिनसे एक रात

Sheena
27-07-2011, 07:29 AM
खैर गुजरी की न पहुँची तेरे दर तक वरना,
आह ने आग लगा दी है जहां ठहरी है।

Sheena
27-07-2011, 07:30 AM
आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक।

Sheena
27-07-2011, 07:30 AM
वो आए बज्म में इतना तो 'मीर' ने देखा,
फिर उसके बाद चिरागों में रौशनी न रही।

Sheena
27-07-2011, 07:31 AM
लिपटा मैं बोसा लेके तो बोले की देखिये,
ये दूसरी खता है वो पहला कसूर था।

Sheena
27-07-2011, 07:32 AM
वो भी मेरे पास से गुजरा इसी अंदाज से,
मैंने भी जाहिर किया,जैसे उसे देखा ना हो।

Sheena
27-07-2011, 07:37 AM
तुम ना आओगे तो मरने की हैं सौ तदवीरें,
मौत कुछ तुम तो नहीं हो कि बुला भी न सकूं।

Sheena
27-07-2011, 07:39 AM
जब तक जिये, बिखरते रहे,टूटते रहे,
हम साँस -साँस क़र्ज़ की सूरत अदा हुए।

Sheena
27-07-2011, 07:40 AM
दो -चार लफ्ज़ कह के मैं खामोश हो गया,
वो मुस्करा के बोले,बहुत बोलते हो तुम।

Sheena
27-07-2011, 07:40 AM
मत पूछ क्या हाल है मेरा तेरे पीछे,
तू देख की क्या रंग है तेरा मेरे आगे।

ईमान मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र,
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।

गो हाथ को जुम्बिश नहीं, आँखों में तो दम है,
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।

Sheena
27-07-2011, 07:41 AM
हर एक बात पे कहते हो तुम की तू क्या है,
तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।
रगों में दौड़ते फिरने के हम नही कायल,
जो आँख ही से ना टपका तो फिर लहू क्या है।

Sheena
27-07-2011, 07:42 AM
मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।

Sheena
27-07-2011, 07:42 AM
जब मैंने कहा की मरता हूँ, मुंह फेर के बोले,
सुनते तो हैं पर इश्क के मारे नहीं देखे।

Sheena
27-07-2011, 07:43 AM
कलेजे में हजारों दाग ,दिल में हसरतें लाखों,
कमाई ले चला हूँ साथ अपने जिंदगी भर की।

Sheena
27-07-2011, 07:44 AM
कह दो इन हसरतों को कहीं और जा बसें,
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में।

उमर-ऐ-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में।

Sheena
27-07-2011, 07:46 AM
हमने हर दौर में तजलील सही है लेकिन
हमने हर दौर के चेहरे को ज़िया बख्शी है
हमने हर दौर में मेहनत की सितम झेलें हैं
हमने हर दौर के हाथों को हिना बख्शी है

Sheena
27-07-2011, 07:46 AM
इश्क में ग़ैरत-ए-जज्बात ने रोने ना दिया
वरना क्या बात थी किस बात ने रोने ना दिया

आप कहते थे के रोने से ना बदलेंगे हालात
उम्र भर आप की इस बात ने रोने ना दिया

Sheena
27-07-2011, 07:47 AM
दश्त-ए-तन्हाई में ए जान-ए-जहां लर्जां हैं
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठो के सराब
दश्त-ए-तन्हाई में दूरी के खस-ओ-ख़ाक तले
खिल रहे हैं तेरे पहलू के समन और गुलाब

Sheena
27-07-2011, 07:48 AM
उठ रही है कहीं कुर्बत से तेरी सांस की आंच
अपनी खुशबु में सुलगती हुई मद्धम मद्धम
दूर उफक पर चमकती हुई कतरा कतरा
गिर रही है तेरी दिलदार नज़र की शबनम

Sheena
27-07-2011, 07:48 AM
उस कदर प्यार से ए जान-ए-जहां रखा है
दिल के रुखसार पे इस वक़्त तेरी याद ने हाथ
यूं गुमां होता है गरचे है अभी सुबह-ए-फिराक
ढल गया हिज्र का दिन आ भी गयी वस्ल की रात

Sheena
27-07-2011, 07:54 AM
बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूं नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूं नहीं जाता

देखता हूं मैं उलझी हुई राहों का तमाशा
जाते है जिधर सब मैं उधर क्यूं नहीं जाता

Sheena
27-07-2011, 07:56 AM
अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शे़र फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं।

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।

Sheena
27-07-2011, 07:57 AM
सब्र कहता है कि रफ्ता-रफ्ता मिट जाएगा दाग,
दिल कहता है की बुझने की ये चिंगारी नही।

Sheena
27-07-2011, 07:58 AM
खुश भी हो लेते हैं तेरे बेकरार,
गम ही गम हो ,इश्क में ऐसा नही।

Sheena
27-07-2011, 07:59 AM
लोग कहते हैं तो लोगों पे ताज़ुब कैसा
सच तो कहते हैं कि नादारों की इज्ज़त कैसी
लोग कहते हैं - मगर आप अभी तक चुप हैं
आप भी कहिये ग़रीबों में शराफत कैसी

Sheena
27-07-2011, 07:59 AM
आप बेवजह परेशान सी क्यों हैं मादाम
लोग कहते हैं तो फिर ठीक ही कहते होंगे
मेरे अहबाब ने तहजीब ना सीखी होगी
मेरे माहौल में इंसान ना रहते होंगे

Sheena
27-07-2011, 08:00 AM
मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा
कोई चिराग नहीं हूँ जो फिर जला लेगा

Sheena
27-07-2011, 08:01 AM
किसको आती है मसीहाई किसे आवाज दूँ
बोल ए खूंखार तन्हाई किसे आवाज दूँ

चुप रहूँ तो हर नफ़स ड्सता है नागन की तरह
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ

Sheena
27-07-2011, 08:02 AM
इस का गिला नहीं की दुआ बे-असर गई
इक आ़ह की थी वो भी कहीं जा के मर गई

ए हमनफ़स ना पूछ जवानी का माजरा
मौज-ए-नसीम थी, इधर आई उधर गई

Sheena
27-07-2011, 08:03 AM
दिल में किस दर्जा बेदिली है अभी
हर खुशी जैसे अजनबी है अभी

फिर बढे हैं क़दम तेरी जानिब
तेरे गम में भी दिलकशी है अभी

Sheena
27-07-2011, 08:03 AM
दुःख फ़साना नहीं के तुझ से कहें
दिल भी माना नहीं के तुझ से कहें

आज तक अपनी बेकली का सबब
खुद भी जाना नहीं के तुझ से कहें

Sheena
27-07-2011, 08:04 AM
अब वही हर्फ़-ए-जुनून सब की जुबां ठहरी है
जो भी चल निकली है वो बात कहाँ ठहरी है

आज तक शैख़ के इकराम में जो शय थी हराम
अब वही दुश्मन-ए-दीन राहत-ए-जान ठहरी है

Sheena
27-07-2011, 08:05 AM
जब कभी बिकता है बाज़ार में मजदूर का गोश्त
शाहराहों पे गरीबों का लहू बहता है
आग सी सीने में रह रह के उबलती है, ना पूछ!
अपने दिल पर मुझे काबू ही नहीं रहता है !!

Sheena
27-07-2011, 08:06 AM
जब कहीं बैठ के रोते हैं वो बे-कस जिनके
अश्क आंखों में बिलखते हुए सो जाते हैं
न-तावानों के निवालों पे झपटते हैं उकाब
बाज़ू तोले हुए, मंडराते हुए आते हैं

Sheena
27-07-2011, 08:06 AM
तुम न आये तो क्या सहर न हुई ।
हां मगर चैन से बसर न हुई ।.
तुम भी अच्छे ,रक़ीब भी अच्छे ।
मैं बुरा था ,मेरी गुज़र न हुई ।।

Sheena
27-07-2011, 08:07 AM
आ कि वाबिस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझसे
जिसने इस दिल को परीख़ाना बना रखा था
जिसकी चाहत में भुला रखी थी दुनिया हमने
दहर को दहर का अफ़साना बना रखा था

Sheena
27-07-2011, 08:08 AM
मेरी बर्बादियों का हमनशीनो
तुम्हें क्या, खुद मुझे भी ग़म नहीं है1

Sheena
27-07-2011, 08:08 AM
सच है हम ही को आप के शिकवे बजा ना थे,
बेशक सितम जनाब के सब दोस्ताना थे।

हाँ जो जफ़ा भी आप ने की,कायदे से की,
हाँ हम ही काराबंद-ए-उसूल-ए-वफ़ा ना थे।

Sheena
27-07-2011, 08:14 AM
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है,
दुशनाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है।

दिल मुद्दई के हर्फ़-ए-मलामत से शाद है,
ए जान-ए-जां, ये हर्फ़ तेरा नाम ही तो है।

Sheena
27-07-2011, 08:14 AM
आ के वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से
जिस ने दिल को परी-खाना बना रखा था.
जिसकी उल्फत में भुला रखी थी दुनिया हम ने
दहर को दहर का अफ़साना बना रखा था.

Sheena
27-07-2011, 08:15 AM
तुझ से खेली हैं वो महबूब हवाएं जिन में
उसके मलबूस की अफ्सुर्दा महक बाकी है.
तुझ पे भी बरसा है उस बाम से महताब का नूर
जिस में बीती हुई रातों की कसक बाकी है.

Rihan Hasan
27-07-2011, 11:50 AM
अपने सिवा बाताओ तुम्हे कूछ मिला है फरज


हजार बार ली है तुमने मेरे दिल कि तालाशीयां
बहुत उम्दा शेर पेश किये दोस्त.......

Rihan Hasan
27-07-2011, 12:08 PM
मत पूछ क्या हाल है मेरा तेरे पीछे,
तू देख की क्या रंग है तेरा मेरे आगे।

ईमान मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र,
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।

गो हाथ को जुम्बिश नहीं, आँखों में तो दम है,
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।

बहुत खूब......

Rihan Hasan
27-07-2011, 12:30 PM
http://photos-f.ak.fbcdn.net/hphotos-ak-ash4/272264_180795851982676_147365588659036_459568_3426 479_o.jpg

तबाहियों का अगर किसी ने सबब पुछा,
ज़ुबान-ए-हाल ने बे-साख्ता कहा, "आँखें"

Rihan Hasan
27-07-2011, 12:39 PM
http://a4.sphotos.ak.fbcdn.net/hphotos-ak-ash4/229634_185944518134476_147365588659036_474547_6157 673_n.jpg?dl=1

भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,
के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी....

badboy123455
27-07-2011, 03:29 PM
बहुत ही खूबसूरत बात कही है,शायर ने.

एक उम्दा शेर के लिए आपको धन्यवाद.



बहुत उम्दा शेर पेश किये दोस्त.......
उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद मित्रों

aawara
27-07-2011, 03:47 PM
जिन्दगी एक सुलगती सी चिता है साहिर
शोला बनती है न ये बुझ के धुँआ होती है

aawara
27-07-2011, 04:02 PM
इतना न पास आ कि तुझे ढूंढते फिरें
इतना न दूर जा कि हमावक्त पास हो

badboy123455
27-07-2011, 05:49 PM
तुम मुझे रूह में ही बसा लो फ़राज़


दिल-ओ-जान के रिश्ते अक्सर टूट जाया करते हैं....

badboy123455
27-07-2011, 05:52 PM
जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,



आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ...

badboy123455
27-07-2011, 05:52 PM
वो मेरी लाश पे आया रो न सका फ़रज़


उस को मेरे सुकून का कितना ख्याल था...

badboy123455
27-07-2011, 05:54 PM
नुक्*तह-चीं है ग़म-ए दिल उस को सुनाए न बने
क्*या बने बात जहां बात बनाए न बने

मैं बुलाता तो हूं उस को मगर अय जज़्*बह-ए दिल
उस पह बन जाए कुछ ऐसी कि बिन आए न बने

खेल सम्*झा है कहीं छोड़ न दे भूल न जाए
काश यूं भी हो कि बिन मेरे सताए न बने

ग़ैर फिर्*ता है लिये यूं तिरे ख़त को कि अगर
कोई पूछे कि यह क्*या है तो छुपाए न बने

इस नज़ाकत का बुरा हो वह भले हैं तो क्*या
हाथ आवें तो उंहें हाथ लगाए न बने

कह सके कौन कि यह जल्*वह-गरी किस की है
पर्*दह छोड़ा है वह उस ने कि उठाए न बने

मौत की राह न देखूं कि बिन आए न रहे
तुम को चाहूं कि न आओ तो बुलाए न बने

बोझ वह सर से गिरा है कि उठाए न उठे
काम वह आन पड़ा है कि बनाए न बने

`इश्*क़ पर ज़ोर नहीं है यह वह आतिश ग़ालिब
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

: ग़ालिब

badboy123455
27-07-2011, 05:56 PM
मेहरबान हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक्त


मैं गया वक्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ

badboy123455
27-07-2011, 05:57 PM
जिसको कभी जानाही नहीं हम उसको खुदा क्यों माने ?


और जिसे जान चुके है, वो खुदा कैसे हो ?????

aawara
28-07-2011, 10:13 AM
सामने हो तो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिसे देखा ही नहीं उसको खुदा कहते हैं

Ranveer
28-07-2011, 11:16 AM
एक बार ही जी भर के सज़ा क्यूँ नहीं देते |
मै हर्फ़ -ए -गलत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते |
मोती हूँ तो दामने मुज्ना में पिरो लो ,
आंसूं हूँ तो पलकों से गिरा क्यूँ नहीं देते |
साया हूँ तो साथ न रखने की वजह क्या ,
पत्थर हूँ तो रास्ते से हटा क्यूँ नहीं देते |

Ranveer
28-07-2011, 11:18 AM
जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,
आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ...

बेहतरीन .........

KHIL@DI_720
28-07-2011, 05:49 PM
जिसको कभी जानाही नहीं हम उसको खुदा क्यों माने ?


और जिसे जान चुके है, वो खुदा कैसे हो ?????
वाह वाह ! वाह वाह !

Noctis Lucis
28-07-2011, 06:22 PM
है मेरी प्यास की शिद्दत पे अगर शक तुझको
ला मेरे सामने बहता हुआ दरिया रख दे |

एक कोज़े में समा जाएगा दरिया क्यूँकर
किस तरह रख के लिफ़ाफ़े में तमन्ना भेजू

कोज़े = एक दूसरे में

Ranveer
28-07-2011, 06:55 PM
उसने दिन रात मुझको सताया इतना
कि नफरत भी हो गई और मोहब्बत भी हो गई.

उसने इस नजाकत से मेरे होठों को चूमा,
कि रोज़ा भी न टुटा और अफ्तारी भी हो गई.

उसने इस अहतराम से, मुझसे मोहब्बत की,
कि गुनाह भी न हुआ और इबादत भी हो गई.

मत पूछ उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था...

उसने इस शिद्दत से मुझे, सीने से लगाया,
कि मौत भी न हुई और जन्नत भी मिल गई.

fullmoon
28-07-2011, 07:13 PM
उसने दिन रात मुझको सताया इतना
कि नफरत भी हो गई और मोहब्बत भी हो गई.

उसने इस नजाकत से मेरे होठों को चूमा,
कि रोज़ा भी न टुटा और अफ्तारी भी हो गई.

उसने इस अहतराम से, मुझसे मोहब्बत की,
कि गुनाह भी न हुआ और इबाबत भी हो गई.

मत पूछ उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था...

उसने इस शिद्दत से मुझे, सीने से लगाया,
कि मौत भी न हुई और जन्नत भी मिल गई.


रणवीर जी क्या नाज़ुक ग़ज़ल है,

REPUTATION के लायक

marwariladka
28-07-2011, 07:15 PM
नमस्कार फुल मून जी..कैसे हो आप?

fullmoon
28-07-2011, 07:16 PM
जिनकी खातिर तोड़ दी सारी सरहदें हमने ,



आज उसीने कह दिया जरा हद में रहा करो ...


वो मेरी लाश पे आया रो न सका फ़रज़


उस को मेरे सुकून का कितना ख्याल था...


एक बार फिर से कहना पड़ेगा.....

"बहुत खूब"

fullmoon
28-07-2011, 07:19 PM
नमस्कार फुल मून जी..कैसे हो आप?



ठीक हूँ विक्की जी,

काफी दिनों बाद आये हैं आप फोरम पर.

अब आप आये हैं तो कोई नयी कविता या शेर लिखिए,

काफी दिनों से आपने कुछ लिखा नहीं

fullmoon
28-07-2011, 07:22 PM
दुनिया भी उसी की है, दुनिया को जो ठुकरा दे,

जितना उसे ठुकराया, उतनी ही क़रीब आयी।

fullmoon
28-07-2011, 07:24 PM
तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं,

मैं वो खोयी हुई इक चीज़ हूँ जिसका पता तुम हो।

क़तील शिफ़ाई

fullmoon
28-07-2011, 07:26 PM
मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,

लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया ।

marwariladka
28-07-2011, 07:28 PM
बर्बादी की देहलीज पर बैठ कर अपने साये से भी डरते हैं
वो हस कर विदा हुई और हम आज भी अपनी किस्मत को रोते हैं!!!

marwariladka
28-07-2011, 07:29 PM
बंधू आपके प्रेम भरे पोस्ट के खातिर एक शेर अर्ज किया है....जरा पढ़ लीजिये...इससे पहली पोस्ट पर..

ठीक हूँ विक्की जी,

काफी दिनों बाद आये हैं आप फोरम पर.

अब आप आये हैं तो कोई नयी कविता या शेर लिखिए,

काफी दिनों से आपने कुछ लिखा नहीं

pathfinder
28-07-2011, 07:34 PM
भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,

के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी....

हजारों इब्ने आदम खुल्द में दिल अपना खो देते
बहुत अच्छा किया जो सर पे आंचल रख लिया तुमने |

pathfinder
28-07-2011, 07:37 PM
तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं,

मैं वो खोयी हुई इक चीज़ हूँ जिसका पता तुम हो।

क़तील शिफ़ाई

क्यूँ तुझे देख कर उठती हैं निगाहें मुझ पर
क्या तेरे चेहरे पे मेरा नाम लिखा होता है |

pathfinder
28-07-2011, 07:38 PM
जब भी आता है तेरा मेरे नाम के साथ
जाने क्यूँ लोग मेरे नाम से जल जाते हैं |

fullmoon
28-07-2011, 07:38 PM
परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में,

हमने जिंदगी गुजारी है किराये के मकानों में...

pathfinder
28-07-2011, 07:41 PM
तबाहियों का अगर किसी ने सबब पुछा,
ज़ुबान-ए-हाल ने बे-साख्ता कहा, "आँखें"

अब तो आँखों में समाती नहीं सूरत कोई
गौर से मैंने तुझे काश न देखा होता |

fullmoon
28-07-2011, 07:41 PM
क्यूँ तुझे देख कर उठती हैं निगाहें मुझ पर
क्या तेरे चेहरे पे मेरा नाम लिखा होता है |


पाथ जी,

बहुत सुन्दर शेर.

REPUTATION तो आपने DISABLE कर रखी है.

फिर भी इस शेर पर REP + देने का बहुत मन था.

pathfinder
28-07-2011, 07:42 PM
मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,

लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया ।

मिलिए जरूर इनसे बड़े मोतबर हैं लोग
करते हैं सर कलम भी बड़े एहतराम से |

pathfinder
28-07-2011, 07:44 PM
पाथ जी,

बहुत सुन्दर शेर.

REPUTATION तो आपने DISABLE कर रखी है.

फिर भी इस शेर पर REP + देने का बहुत मन था.

प्रिय फुल मून जी मैंने केवल नेगेटिव रेप्युटेशन को डिसेबल किया था |क्या आप मुझे नेगेटिव पोइंट्स देना चाहते हैं ?

pathfinder
28-07-2011, 07:46 PM
है देखने वालों को सम्भलने का इशारा
थोड़ी सी नकाब आज वो सरकाए हुए हैं |

marwariladka
28-07-2011, 07:52 PM
है देखने वालों को सम्भलने का इशारा
थोड़ी सी नकाब आज वो सरकाए हुए हैं |


सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये!!!

fullmoon
28-07-2011, 08:30 PM
प्रिय फुल मून जी मैंने केवल नेगेटिव रेप्युटेशन को डिसेबल किया था |क्या आप मुझे नेगेटिव पोइंट्स देना चाहते हैं ?


वो तो अब आपकी कृपा से कोई किसी को दे ही नहीं सकता.

तो मैं आपको कैसे दे सकता हूँ.

आपकी rep पॉवर नहीं दिखती ,इसलिए मुझे लगा की मैं आपको reputation दे ही नहीं सकता,

नहीं तो अब तक आपके इन खूबसूरत शेरों के लिए कई बार दे चुका होता.



"SORRY"

marwariladka
28-07-2011, 08:32 PM
नाराज हो क्या मुझसे भाई..कोई गलती हो गयी क्या?

वो तो अब आपकी कृपा से कोई किसी को दे ही नहीं सकता.

तो मैं आपको कैसे दे सकता हूँ.

आपकी rep पॉवर नहीं दिखती ,इसलिए मुझे लगा की मैं आपको reputation दे ही नहीं सकता,

नहीं तो अब तक आपके इन खूबसूरत शेरों के लिए कई बार दे चुका होता.



"SORRY"

fullmoon
28-07-2011, 08:32 PM
सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये!!!


भाई,

ये कॉमेडी है या गंभीर शायरी,अब तक समझ नहीं पाया?

fullmoon
28-07-2011, 08:34 PM
नाराज हो क्या मुझसे भाई..कोई गलती हो गयी क्या?


नहीं भाई,

आप से कौन नाराज़ हो सकता है,

मैं तो पाथ जी की बात का जवाब दे रहा था.

marwariladka
28-07-2011, 08:36 PM
बंधू इसका अर्थ समझाता हूँ मैं आपको
"सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये!!!"

इसका अर्थ है के उनके लिए हम बदल बदल कर इतना बदल गए के हमारे भीतर अपनी मौलिकता ही नहीं रही....मगर फिर भी उन्हें हमारी क़द्र ही ना थी...जब हमारा जनाजा निकला तब भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा....यह एक आशिक के दिल से निकली शायरी है जो के सीधे दिल से नक़ल कर जुबान पर आ गयी है...

भाई,

ये कॉमेडी है या गंभीर शायरी,अब तक समझ नहीं पाया?

fullmoon
28-07-2011, 08:58 PM
बंधू इसका अर्थ समझाता हूँ मैं आपको
"सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये!!!"

इसका अर्थ है के उनके लिए हम बदल बदल कर इतना बदल गए के हमारे भीतर अपनी मौलिकता ही नहीं रही....मगर फिर भी उन्हें हमारी क़द्र ही ना थी...जब हमारा जनाजा निकला तब भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा....यह एक आशिक के दिल से निकली शायरी है जो के सीधे दिल से नक़ल कर जुबान पर आ गयी है...


इस सुन्दर व्याख्या के लिए reputation

marwariladka
28-07-2011, 09:05 PM
धन्यवाद् मित्र....आप कैसे हो?

इस सुन्दर व्याख्या के लिए reputation

pathfinder
28-07-2011, 10:15 PM
वो तो अब आपकी कृपा से कोई किसी को दे ही नहीं सकता.

तो मैं आपको कैसे दे सकता हूँ.

आपकी rep पॉवर नहीं दिखती ,इसलिए मुझे लगा की मैं आपको reputation दे ही नहीं सकता,

नहीं तो अब तक आपके इन खूबसूरत शेरों के लिए कई बार दे चुका होता.



"SORRY"

ओह..................समझा
प्रिय फुलमून जी मैंने अपनी रेप्युटेशन को छिपा रखा है परन्तु मैं सभी सदस्यों को और सभी सदस्य मुझे रेप्युटेशन दे सकते हैं |और इसमें आपको सोरी कहने की कोई आवश्यकता नहीं है मित्र |

pathfinder
28-07-2011, 10:18 PM
सरकते सरकते हम सरक कर दुनिया से सरक गए
मगर उन्हें क्या,वो तो हमे सरकाने भी नहीं आये!!!

पढ़ी नमाज़े जनाज़ा हमारी गैरों ने
मरे थे जिनके लिए वो रह गए वज़ू करते |

aawara
29-07-2011, 05:37 AM
http://a4.sphotos.ak.fbcdn.net/hphotos-ak-ash4/229634_185944518134476_147365588659036_474547_6157 673_n.jpg?dl=1

भला आँचल ही क्या कम था रुख-ए-ज़ेबा छुपाने को,
के जुल्फों की सियाह दीवार भी लाकर खड़ी कर दी....


जाने किस-किस की मौत आई है
आज रुख पे कोई नकाब नहीं

aawara
29-07-2011, 06:10 AM
करके मोहब्बत अपनी खता हो.. ऐसा भी हो सकता है..
वोह अब भी पाबंद-ए-वफ़ा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

अर्ज़-ए-तलब पे उसकी चुप से ज़ाहिर है इंकार मगर..
शायद वो कुछ सोच रहा हो.. ऐसा भी हो सकता है..

aawara
29-07-2011, 06:11 AM
ग़म बढे़ आते हैं क़ातिल की निगाहों की तरह
तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह

जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाये हमने
वो भी पेश आये हैं इंसाफ़ के शाहों की तरह

aawara
29-07-2011, 06:14 AM
ज़िन्दगी को भी सिला कहते हैं कहनेवाले
जीनेवाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं

चंद मासूम से पत्तों का लहू है "फ़ाकिर"
जिसको महबूब के हाथों की हिना कहते हैं

Sheena
29-07-2011, 06:18 AM
मुम्किन है के तु जिसको समझता है बहाराँ
औरों की निगाहों में वो मौसम हो ख़िज़ाँ का

शायद के ज़मीँ है वो किसी और जहाँ की
तू जिसको समझता है फ़लक अपने जहाँ का

aawara
29-07-2011, 06:29 AM
नाख़ुदा को ख़ुदा कहा है तो फिर
डूब जाओ, ख़ुदा ख़ुदा न करो

इश्क़ है इश्क़, ये मज़ाक नहीं
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो

aawara
29-07-2011, 06:34 AM
शायद ये वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया

उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
हर शय जहाँ हसीन थी, हम तुम थे अजनबी

Sheena
29-07-2011, 06:45 AM
मुहब्बत में वफ़ादारी से बचिये
जहाँ तक हो अदाकारी से बचिये

aawara
29-07-2011, 06:46 AM
वो संग-ए-दिल था कोई बेगाना-ए-वफ़ा था
करते रहें हैं जिसका हम इंतज़ार बरसों

aawara
29-07-2011, 06:49 AM
जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं

हम तो आये थे रहें शाख़ में फूलों की तरह
तुम अगर ख़ार समझते हो तो हट जाते हैं

Sheena
29-07-2011, 06:53 AM
http://abna.ir/a/uploads/124/2/124224_m.jpgसरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता-आहिस्ता

जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा
हया यकलख़त आई और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता

aawara
29-07-2011, 06:58 AM
फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह

ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आयेंगे दुनिया को हवालों की तरह

Sheena
29-07-2011, 06:59 AM
जो दिल माँगा तो वो बोले की ठहरो, याद करने दो
ज़रा सी चीज़ थी हमने खुदा जाने कहाँ रख दी

aawara
29-07-2011, 06:59 AM
आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है

Sheena
29-07-2011, 07:01 AM
कासिम पयाम-ए-शौक़ को इतना ना कर तवील,
कहना फ़क़त ये उन से के, आँखे तरस गयी

Sheena
29-07-2011, 07:02 AM
आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है

तहज़ीब यह नई है, इसको सलाम कहिए
‘रावण’ जो सामने हो, उसको भी ‘राम’ कहिए

मौजूद जब नहीं वो ख़ुद को खुदा समझिए
मौजूदगी में उनकी , ख़ुद को ग़ुलाम कहिए

aawara
29-07-2011, 07:08 AM
बहुत खूब शीना जी . . . . .:salut::speaker:

aawara
29-07-2011, 07:10 AM
बाकिशेरोँ का भी बढिया जबाब दीजिए. . . . .इरशाद

Sheena
29-07-2011, 07:12 AM
बहुत खूब शीना जी . . . . .:salut::speaker:

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शे़र फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं।

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।

Sheena
29-07-2011, 07:14 AM
बरसों में मरासिम बनते हैं लम्हों में भला क्या टूटेंगे,
तू मुझ से बिछड़ना चाहे तो दीवार उठा धीरे धीरे.

aawara
29-07-2011, 07:18 AM
दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं

aawara
29-07-2011, 07:21 AM
बरसों में मरासिम बनते हैं लम्हों में भला क्या टूटेंगे,
तू मुझ से बिछड़ना चाहे तो दीवार उठा धीरे धीरे.

नर्म आवाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
पहली बारिश में ही ये रंग उतर जाते हैं

Sheena
29-07-2011, 07:37 AM
दिन आ गये सबाब के आँचल संभालिये
होने लगी है शहर में हल-चल संभालिये

चलिये संभल संभल के कठिन राह-ए-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आप की पायल संभालिये

aawara
29-07-2011, 07:39 AM
उसकी महफ़िल में वही सच था वो जो कुछ भी कहे
हम भी गूंगों की तरह हाथ उठा देते थे
हम भी अब झूठ की पेशानी को बोसा देंगे
तुम भी सच बोलने वालों को सज़ा देते थे

Sheena
29-07-2011, 07:46 AM
दिल नाउमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

aawara
29-07-2011, 07:53 AM
काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने
तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने
तेरी दस्तार पेतन्कीद की हिम्मत तो नहीं
अपनी पापोश को कालीन कहा है मैंने

Sheena
29-07-2011, 07:57 AM
ये भी क्या एहसान कम हैं देखिये न आप का
हो रहा है हर तरफ़ चर्चा हमारा आप का

चाँद में तो दाग़ है पर आप में वो भी नहीं
चौधवी के चाँद से बड़कर है चेहर आप का

Sheena
29-07-2011, 07:57 AM
या तो मिट जाइये या मिटा दीजिये
कीजिये जब भी सौदा खरा कीजिये

aawara
29-07-2011, 08:02 AM
झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आ
क़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आ
इस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियाँ
लेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आ

Sheena
29-07-2011, 08:06 AM
दाग़ दुनिया ने दिये ज़ख़्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफ़े तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

ख़ुदसे मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले

aawara
29-07-2011, 08:08 AM
धोका मुझे दिये पे हुआ आफ़ताब का
ज़िक्रे-शराब में भी है नशा शराब का
सूरजमुखी के फूल से शायद पता चले
मुँह जाने किसने चूम लिया आफ़ताब का

aawara
29-07-2011, 08:13 AM
लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

aawara
29-07-2011, 08:18 AM
ये अमीरे शहर के दरबार का कानून है
जिसने सजदा कर लिया तोहफे में कुर्सी मिल गई

aawara
29-07-2011, 08:39 AM
दाग़ दुनिया ने दिये ज़ख़्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफ़े तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

ख़ुदसे मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले


हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|
न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

pathfinder
29-07-2011, 09:00 AM
तेरे इश्क ने अता की मुझे कायिनाते उल्फत
मुझे सबसे दुश्मनी थी तेरी दोस्ती से पहले |


अता-प्रदान
कायिनाते उल्फत -सारे ज़माने की मुहब्बत |

aawara
29-07-2011, 09:22 AM
नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाये बहुत
हम उनसे बिछुड़े तो दिल में ख्याल आये बहुत

थीं उनको डूबते सूरज से निस्बतें कैसी !
ढली जो शाम तो कुछ लोग याद आये बहुत