PDA

View Full Version : महान शायरों के चंद शेर



Pages : 1 2 3 4 5 6 [7] 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19

Rihan Hasan
31-08-2011, 05:00 PM
तुम्हारे चाँद से चेहरे की जब भी दीद होती है,
उसी दिन फूल खिलते हैं उसी दिन ईद होती है
http://www.gixmi.com/wp-content/uploads/2011/02/shumaila-sardar-gujrat-girl-768x1024.jpg

aawara
01-09-2011, 11:57 AM
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा

Rihan Hasan
01-09-2011, 02:57 PM
बात बे बात टूट जाता है,
दिल भी कच्चा मकान है शायद

Rihan Hasan
01-09-2011, 03:00 PM
ऐ इश्क देख हम भी हैं किस दिल के आदमी,
मेहमाँ बना के ग़म को कलेजा खिला दिया

Rihan Hasan
01-09-2011, 03:04 PM
ये दुःख नहीं के उसने निगाह बदल ली मुझसे,
ग़म तो ये है के वो सो गया तसल्ली दिए बग़ैर

aawara
01-09-2011, 03:15 PM
न जाने कब तेरे दिल पर नयी सी दस्तक हो
मकान खाली हुआ है कोई तो आएगा

aawara
01-09-2011, 03:17 PM
तुम्हे ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लायेगा

mamta007
02-09-2011, 07:14 AM
बहुत बढ़िया सूत्र..........

badboy123455
02-09-2011, 02:53 PM
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा



ये दुःख नहीं के उसने निगाह बदल ली मुझसे,
ग़म तो ये है के वो सो गया तसल्ली दिए बग़ैर



तुम्हे ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लायेगा



तुम्हारे चाँद से चेहरे की जब भी दीद होती है,
उसी दिन फूल खिलते हैं उसी दिन ईद होती है

http://www.gixmi.com/wp-content/uploads/2011/02/shumaila-sardar-gujrat-girl-768x1024.jpg


क्या बात हे भाइयो
रिहान भाई तो हे ही कमाल अबकी बार तो आवारा जी भी छा गए मस्त ......मस्त

aawara
02-09-2011, 03:37 PM
आपकी कमी खल रही थी दोस्त

तुम्हारे साथ ये मौसम फरिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा

chandan_0123
02-09-2011, 04:36 PM
भाई बहुत ही उम्दा शायरिया
मेरे पास तो तारीफ के लिए शब्द भी नहीं है

fullmoon
02-09-2011, 08:40 PM
बात बे बात टूट जाता है,
दिल भी कच्चा मकान है शायद



ये दुःख नहीं के उसने निगाह बदल ली मुझसे,
ग़म तो ये है के वो सो गया तसल्ली दिए बग़ैर



रिहान भाई,

आपके द्वारा प्रस्तुत शेर तो मेरे लिए उस ICE क्रीम :cone:की तरह से है,जिसे जितना खाया जाए,उतना और खाने को दिल मचलता है...
इसलिए कृपया इस सूत्र में अपनी पोस्टिंग की संख्या बढायें.

badboy123455
02-09-2011, 10:12 PM
आपकी कमी खल रही थी दोस्त

तुम्हारे साथ ये मौसम फरिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा

मित्र मेने भी आपको मिस किया
अब रंग में आ जाओ
शानदार शायरिया सुनाते रहो

badboy123455
02-09-2011, 10:18 PM
भाई बहुत ही उम्दा शायरिया
मेरे पास तो तारीफ के लिए शब्द भी नहीं है

हा हा हा रिहान भाई के लिए तो मेरे पास भी शब्द नहीं बस मस्त छोरा हे और मस्त शायरिया

dev660
02-09-2011, 10:21 PM
भाई अपने खुद के चलेंगे क्या????

NaKShtR
02-09-2011, 10:22 PM
तू छोड़ रहा है, तो ख़ता इसमें तेरी क्या,
हर शख्स मेरा साथ, निभा भी नहीं सकता

वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए,
ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता.....

dev660
02-09-2011, 10:23 PM
""""""" सुना पत्थर को हैं हमने कि जिन्दा ये भी होते हैं ,
इन्हें फेंको किसी दरिया मैं तो आवाज करते हैं """"""

badboy123455
02-09-2011, 10:38 PM
भाई अपने खुद के चलेंगे क्या????


चलेगे भाई .........

badboy123455
02-09-2011, 10:44 PM
""""""" सुना पत्थर को हैं हमने कि जिन्दा ये भी होते हैं ,
इन्हें फेंको किसी दरिया मैं तो आवाज करते हैं """"""



वाह वाह वाह
क्या ये आपकी खुद की रचना हे

NaKShtR
02-09-2011, 10:49 PM
तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इतनी शिद्दत के साथ,
जिस बला का प्यार तुझसे बे-ख़बर मैंने किया ।

NaKShtR
02-09-2011, 10:52 PM
कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे
सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा

aawara
03-09-2011, 03:17 PM
वो मुझे भूल गई इसकी शिकायत क्या है
रंज तो ये है के रो-रो के भुलाया होगा

badboy123455
03-09-2011, 04:17 PM
वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए,
ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता.....


तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इतनी शिद्दत के साथ,
जिस बला का प्यार तुझसे बे-ख़बर मैंने किया ।


वो मुझे भूल गई इसकी शिकायत क्या है
रंज तो ये है के रो-रो के भुलाया होगा


वाह क्या बात हे खासकर
वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए,
ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता..

Rihan Hasan
03-09-2011, 11:45 PM
बहुत अच्छे दोस्तों
बढ़िया महफ़िल जमा रखी है
:clap::clap:

Teach Guru
03-09-2011, 11:51 PM
बहुत खूब दोस्तों ............

Rihan Hasan
03-09-2011, 11:55 PM
गलत फेहमियों में जवानी गुजार दी,
कभी हम नहीं समझे कभी तुम नहीं समझे

Rihan Hasan
04-09-2011, 12:00 AM
हजारों तूफान आये, लाखों आंधियो ने कोशिश की,
पर इस दिल को तोड़ने में तेरा इंकार जीत गया

dev b
04-09-2011, 12:14 AM
बहुत अच्छा सूत्र है ...बधाई

Rihan Hasan
04-09-2011, 06:34 PM
मुझे आखिर वो कैसे ढूँढ लेता,
के दिल में आँख जो रखता नहीं था

Rihan Hasan
04-09-2011, 06:47 PM
जिनके आँगन में अमीरी का शज़र लगता है,
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है
शज़र- पेड़

Rihan Hasan
04-09-2011, 06:51 PM
अक्ल वालों के मुक़द्दर में ये ज़ोक-ए-जूनून कहा,
ये इश्क वाले हैं जो हर चीज़ लुटा देते हैं

Rihan Hasan
04-09-2011, 07:01 PM
कोई जन्नत का तालिब है कोई ग़म से परेशाँ है,
ग़रज सजदा कराती है इबादत कौन करता है

aawara
04-09-2011, 10:14 PM
लाजबाब रिहान भाइ . . . . . .शानदार

aawara
04-09-2011, 10:15 PM
बस यही एक जुर्म है अपना
हम मोहब्बत से काम लेते है

badboy123455
04-09-2011, 10:16 PM
गलत फेहमियों में जवानी गुजार दी,
कभी हम नहीं समझे कभी तुम नहीं समझे





हजारों तूफान आये, लाखों आंधियो ने कोशिश की,
पर इस दिल को तोड़ने में तेरा इंकार जीत गया




जिनके आँगन में अमीरी का शज़र लगता है,
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है
शज़र- पेड़




कोई जन्नत का तालिब है कोई ग़म से परेशाँ है,
ग़रज सजदा कराती है इबादत कौन करता है




रिहान भाई क्या बोलू स्पीच लेस हो गया हू
आपकी शायरी बस
number 1 हे
सबसे उम्दा

aawara
04-09-2011, 10:16 PM
जब कभी तेरा नाम लेते है
दिल से हम इन्तिक़ाम लेते है
हर कदम पर गिरे मगर सीखा
कैसे गिरतों को थाम लेते है

fullmoon
04-09-2011, 10:24 PM
कोई जन्नत का तालिब है कोई ग़म से परेशाँ है,
ग़रज सजदा कराती है इबादत कौन करता है


रिहान भाई,

ये दिल मांगे MORE ....

EAST OR WEST RIHAN IS THE BEST :bloom:....

बस इतना ही लिख सकता हूँ क्योंकि रेपो तो आपको अभी दे ही नहीं पा रहा हूँ...

arjun32
05-09-2011, 12:03 AM
सुखन मुश्ताक है आलम हमारा
गनीमत है जहाँ में दम हमारा
रहे हम आलमे मस्ती में अक्सर
रहा कुछ और ही आलम हमारा
बहुत ही दूर हमसे भागते हो
करो हो पास कुछ तो कम हमारा
बिखर जाते हैं कुछ गेसू तुम्हारे
हुआ है कामे दिल बरहम हमारा
रखे रहते हैं दिल पर हाथ ऐ 'मीर'
यहीं शायद कि है सब ग़म हमारा

BHARAT KUMAR
05-09-2011, 01:04 AM
रिहान जी, आवारा जी और बाकी के सभी सदस्यों को बहुत शुक्रिया जिन्होंने इस सूत्र को बेमिशाल शेरों से भर दिया है!

Rihan Hasan
05-09-2011, 10:47 AM
रिहान भाई,

ये दिल मांगे MORE ....

EAST OR WEST RIHAN IS THE BEST :bloom:....

बस इतना ही लिख सकता हूँ क्योंकि रेपो तो आपको अभी दे ही नहीं पा रहा हूँ...


रेपो से क्या होता है राकेश जी...
आप मित्रों का दिया हुआ सम्मान इससे कहीं बढ़कर है..
सभी मित्रों को धन्यवाद.....

Rihan Hasan
05-09-2011, 10:55 AM
सारा ही शहर उसके ज़नाजे में था शरीक,
तन्हाइयों के खौफ से जो शख्स मर गया

Rihan Hasan
05-09-2011, 11:01 AM
अफ़सोस तो ये है के तू कमसिन भी नहीं है,
फिर क्यों तेरे हाथों में खिलोने की तरह हूँ

Rihan Hasan
05-09-2011, 11:04 AM
बे सबब यूँ ही सर-ए-शाम निकल आते हैं,
हम बुलाएँ उन्हें तो काम निकल आते हैं

arjun32
05-09-2011, 10:55 PM
आता है दागे हसरते- दिल का शुमार याद
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब, ऐ खुदा न मांग
(ग़ालिब)

Teach Guru
06-09-2011, 01:58 PM
अति उतम............

aawara
06-09-2011, 04:35 PM
रेपो से क्या होता है राकेश जी...
आप मित्रों का दिया हुआ सम्मान इससे कहीं बढ़कर है..
सभी मित्रों को धन्यवाद.....



अफ़सोस तो ये है के तू कमसिन भी नहीं है,
फिर क्यों तेरे हाथों में खिलोने की तरह हूँ

रेपो देने से घूम फिरकर हमारा ही फायदा होता है रिहान जी , इसलिए आपको लेना ही पड़ेगा .........++++++

aawara
06-09-2011, 04:40 PM
http://www.rhinoplastyinbeverlyhills.com/wp-content/uploads/2009/02/mirror_picass_girlbefore_lg.jpg




तूने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी
ख़ुदपरस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझको

stranger216
06-09-2011, 05:27 PM
कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए
जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

मैं उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे
सुनेगा तो लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा

मैं इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा,
इम्तेहान इसके बाद मेरा क्या लेगा,

stranger216
06-09-2011, 05:47 PM
तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिये थोड़ी है

इक जरा सा गमे दौरां का भी हक था जिस पर,
मैंने वो साँस भी तेरे लिए रख छोड़ी है

stranger216
06-09-2011, 06:19 PM
जाने क्या ज़माना हमसे चाहता हैं !
हर कोई हमें आज़माना चाहता हैं !!
जाने क्या हैं हमारे चेहरे में !
हर कोई हमें हँसा के फिर रुलाना चाहता हैं !!

रोज टांके उथेड़े जाते हैं. रोज ज़ख्मे जिगर को सीता हु,
जाने क्यों लोग पड़ना चाहते हैं, मैं कुरान हु न गीता हु

Dark Rider
07-09-2011, 06:46 AM
बस दुआ इतनी है , यह जिंदगी इसी तरह कट जाए ,
तू जगाए मुझे , तेरी गोद में ही नींद मुझे आये |

Dark Rider
07-09-2011, 07:33 AM
तुझे एक मुददत से जानता था मै , पर पता नही क्यों दूरियाँ थी
आज तू है पास मेरे , पर फिर भी क्यों वही दूरियाँ है
न इसमें तेरी खता है न मेरी
बस यह जिम्मेदार है तो सिर्फ यह दूरियाँ
कोई पूछता मुझसे तो कहता की क्या है यह दूरियाँ
हा प्यार के लिए यह भी जिम्मेदार है
लोग अक्सर पास वाले को भूल जाते है
इतनी शिद्दत के लिए
यही दूरियाँ जिम्मेदार है
दूरियाँ कम नही है किसी भी प्यार के लिए
पर मुझे तो अब दूरियो से भी प्यार है
हा कितनी बैचेन करती है यह दूरियाँ
हा मुझे अब दूरियो से प्यार है |

Dark Rider
07-09-2011, 07:45 AM
तन्हाई में जब कभी आयेगा ख़याल
भीगेंगे आँखों के कँवल, याद रखना


पहनोगे जब भी मेरी यादों के लिबास
हवा उड़ाएगी आँचल, याद रखना

मैं याद रखूँगा ये शोखियाँ तुम्हारी
तुम भी मेरे आँसू चंचल, याद रखना

arjun32
09-09-2011, 09:07 AM
ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया
तमाम रात क़यामत का इन्तज़ार किया

हंसा हंसा के शब-ए-वस्ल अश्क-बार किया
तसल्लिया मुझे दे-दे के बेकरार किया

हम ऐसे मह्व-ए-नज़ारा न थे जो होश आता
मगर तुम्हारे तग़ाफ़ुल ने होशियार किया

फ़साना-ए-शब-ए-ग़म उन को एक कहानी थी
कुछ ऐतबार किया और कुछ ना-ऐतबार किया

ये किसने जल्वा हमारे सर-ए-मज़ार किया
कि दिल से शोर उठा, हाए! बेक़रार किया

तड़प फिर ऐ दिल-ए-नादां, कि ग़ैर कहते हैं
आख़िर कुछ न बनी, सब्र इख्तियार किया

भुला भुला के जताया है उनको राज़-ए-निहां
छिपा छिपा के मोहब्बत के आशकार किया

तुम्हें तो वादा-ए-दीदार हम से करना था
ये क्या किया कि जहाँ के उम्मीदवार किया

ये दिल को ताब कहाँ है कि हो मालन्देश
उन्हों ने वादा किया हम ने ऐतबार किया

न पूछ दिल की हक़ीकत मगर ये कहते हैं
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया

कुछ आगे दावर-ए-महशर से है उम्मीद मुझे
कुछ आप ने मेरे कहने का ऐतबार किया


(दाग़ देहलवी)

badboy123455
09-09-2011, 01:35 PM
सारा ही शहर उसके ज़नाजे में था शरीक,
तन्हाइयों के खौफ से जो शख्स मर गया




अफ़सोस तो ये है के तू कमसिन भी नहीं है,
फिर क्यों तेरे हाथों में खिलोने की तरह हूँ



http://www.rhinoplastyinbeverlyhills.com/wp-content/uploads/2009/02/mirror_picass_girlbefore_lg.jpg




तूने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी
ख़ुदपरस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझको




बस दुआ इतनी है , यह जिंदगी इसी तरह कट जाए ,
तू जगाए मुझे , तेरी गोद में ही नींद मुझे आये |


तन्हाई में जब कभी आयेगा ख़याल
भीगेंगे आँखों के कँवल, याद रखना


पहनोगे जब भी मेरी यादों के लिबास
हवा उड़ाएगी आँचल, याद रखना

मैं याद रखूँगा ये शोखियाँ तुम्हारी
तुम भी मेरे आँसू चंचल, याद रखना



वाह मित्रों गजब
अति सुंदर
शानदार शायरिया :clap:

JEETJAWAN
09-09-2011, 03:34 PM
इश्क ने कर दिया मनो भाई को निक्कमा

वरना आदमी ये भी बड़े काम के थे

वाह वाह वाह वाह ....................

JEETJAWAN
09-09-2011, 03:36 PM
तुझे एक मुददत से जानता था मै , पर पता नही क्यों दूरियाँ थी
आज तू है पास मेरे , पर फिर भी क्यों वही दूरियाँ है
न इसमें तेरी खता है न मेरी
बस यह जिम्मेदार है तो सिर्फ यह दूरियाँ
कोई पूछता मुझसे तो कहता की क्या है यह दूरियाँ
हा प्यार के लिए यह भी जिम्मेदार है
लोग अक्सर पास वाले को भूल जाते है
इतनी शिद्दत के लिए
यही दूरियाँ जिम्मेदार है
दूरियाँ कम नही है किसी भी प्यार के लिए
पर मुझे तो अब दूरियो से भी प्यार है
हा कितनी बैचेन करती है यह दूरियाँ
हा मुझे अब दूरियो से प्यार है |



वाह वाह वाह वाह वाह

JEETJAWAN
09-09-2011, 04:03 PM
कल रात वो मिली ख्वाब में !
हम ने पूछा क्यों ठुकराया आपने !!
जब देखा तो उनकी आँखों में भी आँसू थे !
फिर कैसे पूछता क्यों रुलाया आपने !!

वाह वाह वाह वाह

aawara
12-09-2011, 02:16 AM
सिर्फ मैं हाथ थाम सकूँ उसका....
मुझ पे इतनी इबादत सी कर दे..
वो रह ना पाऐ एक पल भी मेरे बिन...
ऐ खुदा तू उसको मेरी आदत सी कर दे....

aawara
12-09-2011, 02:26 AM
उम्रभर तलाशा था हमने जिस हंसी को
आज वो खुद की ही दीवानगी पे आई है

aawara
12-09-2011, 02:31 AM
सुनते है की मिल जाती है हर चीज दुआ से
एक रोज़ तुम्हे मांग के देखेंगे खुदा से
आईने में वो अपनी अदा देख रहे है
मर जाये की मिट जाये कोई उनकी बला से

Dark Rider
12-09-2011, 07:10 AM
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में

Dark Rider
12-09-2011, 07:15 AM
कभी तुम अपनी मोहबबत का ऐतबार तो दो,
मैं चाहूँ टूट के तुमको, ये इखतियार तो दो

गुज़रती ही नहीं मुझसे ये जिंदगी तनहा,
सहारा पयार का देकर इसे गुज़ार तो दो,

मैं सोचता हूँ तुमहारे बगैर कया होगा
दिल-ओ-दिमाग पे इक बोझ है उतार तो दो,

मेरे खयाल की राहों को कहकशाँ कर दो,
कि रौशनी से मेरी जिंदगी सँवार तो दो

उममीद-ए-वफा गम-ए-हिज़र का मुददा है,
मैं इंतज़ार करूँ मगर जबत-ए-इंतज़ार तो दो......!!

Dark Rider
12-09-2011, 08:13 AM
मै कोई शैतां नही, न कोई फरिश्ता हू !
पानी का एक लोटा हू, थोडा छलक जाता हू !


Dark Rider

Raman46
12-09-2011, 08:52 AM
दिन मैं तेरे नूर से रोशन यादे
शाम की लाली से बुजी बुजी वो यादे

Raman46
12-09-2011, 08:53 AM
वो समंदर की गीले रेत पैर संग तेरे चलना
आज सागर की लहर ने मिटा ली वो यादे

Raman46
12-09-2011, 08:53 AM
बरसात की बूंदों मैं हमारा यु गुम होना
वही बूंदें आज आंसू बन कर आती है यादों मैं

Raman46
12-09-2011, 08:54 AM
तेरे संग रातों मैं चाँद को ताकते रहना
बिखर कर अब तो तारे हो गई वो यादे

Raman46
12-09-2011, 08:55 AM
जिस सफर मैं दो पल का हम सफर था वो
उस राह पैर खड़ी अकेली वो यादे

Raman46
12-09-2011, 08:55 AM
जिस को एक पल के लिए ना भूल सके हम
उन के लिए बस बुन कर रह गई वो यादे ....

Raman46
12-09-2011, 08:57 AM
मै कोई शैतां नही, न कोई फरिश्ता हू !
पानी का एक लोटा हू, थोडा छलक जाता हू !


Dark Rider



नहीं मिलते शब्द लिखने को तुम्हारी वो यादे
इसीलिए लिख रहा हूँ अनुभव तुम्हारी याद मे.

BHARAT KUMAR
18-09-2011, 05:51 AM
बेहतरीन
बेहतरीन
बेहतरीन!

इस सूत्र के हर पेज पर कमाल कि शायरी लिखी हुई है! आप सबका शुक्रिया इतने बड़े और शानदार संग्रह उपलब्द करवाने के लिए!

arjun32
18-09-2011, 09:00 PM
अब जो इक हसरत-ए-जवानी है
उम्र-ए-रफ़्ता की ये निशानी है।

ख़ाक थी मौजज़न जहाँ में, और
हम को धोखा ये था के पानी है।
(मीर तक़ी 'मीर')

arjun32
18-09-2011, 09:17 PM
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा

यहाँ तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

ग़ज़ब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते
वो सब के सब परीशाँ हैं वहाँ पर क्या हुआ होगा

तुम्हारे शहर में ये शोर सुन-सुन कर तो लगता है
कि इंसानों के जंगल में कोई हाँका हुआ होगा

कई फ़ाक़े बिता कर मर गया जो उसके बारे में
वो सब कहते हैं अब, ऐसा नहीं,ऐसा हुआ होगा

यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बसते हैं
ख़ुदा जाने वहाँ पर किस तरह जलसा हुआ होगा

चलो, अब यादगारों की अँधेरी कोठरी खोलें
कम-अज-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा
(दुष्यंत कुमार)

fullmoon
18-09-2011, 09:36 PM
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा

यहाँ तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

चलो, अब यादगारों की अँधेरी कोठरी खोलें
कम-अज-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा
(दुष्यंत कुमार)


लाजवाब...लाजवाब....:clap:: clap:

badboy123455
18-09-2011, 11:20 PM
यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बसते हैं
ख़ुदा जाने वहाँ पर किस तरह जलसा हुआ होगा



क्या बात हे शाबाश

Dark Rider
19-09-2011, 05:17 PM
मौत लम्हे की सदा, जिंदगी धड़कन की पुकार
मै यही सोच के जिंदा हूँ की मर जाना है

Dark Rider
19-09-2011, 05:33 PM
यही हालात इब्तदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे

बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे

इन चिराग़ों में तेल ही कम था
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे

उसके बंदों को देखकर कहिये
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

Dark Rider
19-09-2011, 05:35 PM
ख़ुली जो आँख तो वो था न वो ज़माना था
दहकती आग थी तन्हाई थी फ़साना था

ग़मों ने बाँट लिया है मुझे यूँ आपस में
के जैसे मैं कोई लूटा हुआ ख़ज़ाना था

ये क्या के चंद ही क़दमों पे थक के बैठ गये
तुम्हें तो साथ मेरा दूर तक निभाना था

मुझे जो मेरे लहू में डुबो के गुज़रा है
वो कोई ग़ैर नहीं यार एक पुराना था

भरम ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत का जाँ रह जाता
ज़रा सी देर मेरा प्यार तो आज़माना था

ख़ुद अपने हाथ से "शहज़ाद" उस को काट दिया
के जिस दरख़्त के टहनी पे आशियाना था

Dark Rider
19-09-2011, 05:43 PM
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

मेरे रुकने से मेरी साँसे भी रुक जायेंगी
फ़ासले और बड़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

ज़हर पीने की तो आदत थी ज़मानेवालो
अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

चलती राहों में यूँ ही आँख लगी है 'फ़ाकिर'
भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

arjun32
19-09-2011, 10:49 PM
‘अनमोल’ अपने आप से कब तक लड़ा करें
जो हो सके तो अपने भी हक़ में दुआ करें

हम से ख़ता हुई है कि इंसान हैं हम भी
नाराज़ अपने आप से कब तक रहा करें

fullmoon
19-09-2011, 10:53 PM
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

मेरे रुकने से मेरी साँसे भी रुक जायेंगी
फ़ासले और बड़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

ज़हर पीने की तो आदत थी ज़मानेवालो
अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

चलती राहों में यूँ ही आँख लगी है 'फ़ाकिर'
भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

वाह बहुत खूब मनोज जी,

बहुत ही गहरी सोच की रचना पेश की आपने....

arjun32
19-09-2011, 10:54 PM
भरम ख़ुलूस-ओ-मोहब्बत का जाँ रह जाता
ज़रा सी देर मेरा प्यार तो आज़माना था

ख़ुद अपने हाथ से "शहज़ाद" उस को काट दिया
के जिस दरख़्त के टहनी पे आशियाना था
बहुत खूब....
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया

कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

महलों में हमने कितने सितारे सजा दिये
लेकिन ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया

तन्हाइयों ने तोड़ दी हम दोनों की अना
आईना बात करने पे मज़बूर हो गया

सुब्हे-विसाल पूछ रही है अज़ब सवाल
वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया

कुछ फल जरूर आयेंगे रोटी के पेड़ में
जिस दिन तेरा मतालबा मंज़ूर हो गया
(बशीर बद्र)

arjun32
19-09-2011, 11:00 PM
अपनी अपनी खूबियाँ और ख़ामियाँ भी बाँट लें
शोहरतें तो बाँट ली रुसवाइयाँ भी बाँट लें

बाँट ली आसानियाँ, दुशवारियाँ भी बाँट लें
आओ अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियाँ भी बाँट लें

बँट गया है घर का आँगन, खेत सारे बँट गए
क्यों न अब बंजर ज़मीं और परतियाँ भी बाँट लें

कल अगर मिल बाँट के खाए थे तर लुक्मे तो आज
आओ हम अपनी ये सूखी रोटियाँ भी बाँट लें

अपने हिस्से की ज़मीं तो दे चुके हमसाए को
अब बताओ क्या हम अपनी वादियाँ भी बाँट लें

दर्द, आँसू, बेकरारी इक तरफ़ ही क्यूँ रहे
इश्क़ में हम अपनी अपनी पारियाँ भी बाँट लें
( रामप्रकाश 'बेखुद')

fullmoon
19-09-2011, 11:04 PM
बहुत खूब....
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया

कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे पढ़े-लिखे मशहूर हो गया


(बशीर बद्र)


अपनी अपनी खूबियाँ और ख़ामियाँ भी बाँट लें
शोहरतें तो बाँट ली रुसवाइयाँ भी बाँट लें

बाँट ली आसानियाँ, दुशवारियाँ भी बाँट लें
आओ अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियाँ भी बाँट लें


( रामप्रकाश 'बेखुद')

अर्जुन जी,

आपके लिए फिर से कहूँगा....

कविताओं/ग़ज़ल के मामले में आपका taste बहुत अच्छा है ..

"good selection "

arjun32
19-09-2011, 11:51 PM
अर्जुन जी,

आपके लिए फिर से कहूँगा....

कविताओं/ग़ज़ल के मामले में आपका taste बहुत अच्छा है ..

"good selection "

हौसला आफजाई के लिए शुक्रिया....


इस शहर में ये अज़ब यारो तमाशा देखा
थी जरूरत जहाँ सूरज की कुहासा देखा

प्यास ही सिमटी हुई हमको दिखाई दी वहाँ
झाँक कर एक कुँए में जो जरा सा देखा

पीठ में घोंपते देखा था, छुरा रात जिन्हें
सुबह देते हुए उनको ही दिलासा देखा

कल तलक ज़र्द थे फूलों के ही चेहरे यारों
आज तो कलियों का भी रंग उड़ा सा देखा

रास्ता भूल के हम जाने कहाँ आ पहुँचे
जिसको भी देखा यहाँ पर तो लुटा सा देखा

दुनिया वालों ने तभी फेंकी है घर की कीचड़
जब भी दामन को 'अनिल' तेरा धुला सा देखा

Sharma1989
20-09-2011, 03:01 AM
हमारे जीने का अलग अंदाज है
एक आँख मे आँसू तो दूसरे मे खवाब है
टूटे हुये ख़ाब पे आँसू बहा लेते है
दूसरी आँख मे फिर ख़ाब सजा लेते है

Sharma1989
20-09-2011, 03:20 AM
मेने उससे कहा .............
छोड़ दो या तोड़ दो मुझे ...

उसने हंस कर मुझे गले लगाया ओर कहा
छोड़ रही हु आज तुम्हें
टूट तो तुम खुद जाओगे ..................

fullmoon
20-09-2011, 10:30 AM
मेने उससे कहा .............
छोड़ दो या तोड़ दो मुझे ...

उसने हंस कर मुझे गले लगाया ओर कहा
छोड़ रही हु आज तुम्हें
टूट तो तुम खुद जाओगे ..................

शर्मा जी,

क्या बात लिखी है,

अति सुन्दर....

REPUTATION .....

Dark Rider
20-09-2011, 11:24 AM
मेने उससे कहा .............
छोड़ दो या तोड़ दो मुझे ...

उसने हंस कर मुझे गले लगाया ओर कहा
छोड़ रही हु आज तुम्हें
टूट तो तुम खुद जाओगे ..................

वाकई में सच कह दिया , मेरी भी आपको ++

Dark Rider
22-09-2011, 03:47 PM
हर ज़ख्म नया पुराने ज़ख्मों की गिनती घटा देता है
जाने मुझे कब रखना उनके सितम का हिसाब आएगा

badboy123455
22-09-2011, 04:13 PM
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में


मै कोई शैतां नही, न कोई फरिश्ता हू !
पानी का एक लोटा हू, थोडा छलक जाता हू !


Dark Rider


हर ज़ख्म नया पुराने ज़ख्मों की गिनती घटा देता है
जाने मुझे कब रखना उनके सितम का हिसाब आएगा


वाह वाह वाह......
लाजवाब..........

badboy123455
22-09-2011, 04:14 PM
ईश्वर का दिया कभी 'अल्प' नहीं होता,जो टूट जाये वो 'संकल्प' नहीं होता,हार को
लक्ष्य से दूर ही रखना,क्यूंकि जीत का कोई 'विकल्प' नहीं होता....

aawara
22-09-2011, 04:32 PM
उँगलियाँ आज भी इसी सोच में गुम है " फ़राज़ "
उसने किस तरह नए हाथ को थामा होगा !!!

Teach Guru
22-09-2011, 04:48 PM
अति उतम मित्र बहुत बढ़िया है मनोरंजन से भरपूर, लगे रहो........

badboy123455
22-09-2011, 05:13 PM
जहाँ हर सर झुक जाए वही मंदिर है, जहाँ हर नदी मिल जाये वही समंदर है
ज़िन्दगी हर मोड़ पर एक युद्ध है जो हर युद्ध जीत जाये वही सिकंदर है

anoop_address
22-09-2011, 08:26 PM
वाह वाह अद्भुत जवाब नहीं

anoop_address
22-09-2011, 08:27 PM
टूटे दिलको ना सहलाओ कभी,
अंगारे सुलगते है इस ख़ाक में,

टूटे दिलको ना सहलाओ कभी,
अंगारे सुलगते है इस ख़ाक में,

ना जल जाए हाथ आपका, ए मेरे दोस्त,

इस दिलको तो आदत है…
इस दिलको तो अब आदत है

arjun32
22-09-2011, 09:46 PM
ईश्वर का दिया कभी 'अल्प' नहीं होता,जो टूट जाये वो 'संकल्प' नहीं होता,हार को
लक्ष्य से दूर ही रखना,क्यूंकि जीत का कोई 'विकल्प' नहीं होता....


बहुत सुंदर ....

arjun32
22-09-2011, 09:52 PM
हमारे दरमियाँ ऐसा कोई रिश्ता नहीं था
तेरे शानों पे कोई छत नहीं थी
मेरे ज़िम्मे कोई आँगन नहीं था
कोई वादा तेरी ज़ंज़ीर-ए-पा बनने नहीं पाया
किसी इक़रार ने मेरी कलाई को नहीं थामा
हवा-ए-दश्त की मानिन्द
तू आज़ाद था
रास्ते तेरी मर्ज़ी के तबे थे
मुझे भी अपनी तन्हाई पे
देखा जाये तो
पूरा तसर्रुफ़ था
मगर जब आज तू ने
रास्ता बदला
तो कुछ ऐसा लगा मुझ को
के जैसे तूने मुझ से बेवफ़ाई की
(परवीन शाकिर)

Dark Rider
23-09-2011, 09:09 AM
रात गुजर जायेगी बहते हुए पानी की तरह
तुम कलाई से बंधे वक्त को देखा न करो

Dark Rider
23-09-2011, 09:12 AM
तुम्हे उल्फत नही मुझसे , मुझे नफरत नही तुमसे
अजीब शिकवा सा रहता है , तुम्हे मुझसे मुझे तुमसे

saam
23-09-2011, 09:29 AM
उसे इतना ही कहा था के बरसो के प्यासे हे,
होठो पे होठ रखकर खामोश कर दिया....

Dark Rider
23-09-2011, 11:08 AM
उसे इतना ही कहा था के बरसो के प्यासे हे,
होठो पे होठ रखकर खामोश कर दिया....

बहुत खूब ......................

saam
23-09-2011, 02:16 PM
बहुत खूब ......................

शुक्रिया भाई.

saam
23-09-2011, 02:25 PM
मिला वो भी नही करते ,मिला हम भी नही करते
दगा वो भी नही करते ,दगा हम भी नही करते|
उन्हें रुसवाई का दुःख, हमें तन्हाई का डर
गीला वो भी नही करते शिकवा हम भी नही करते |
किसी मोड़ पे मुलाकात हो जाती है अक्सर
रुका वो भी नही करते ठहरा हम भी नहीं करते |
जब भी देखते हैं उन्हें सोचते हैं कुछ कहें उनसे
सुना वो भी नही करते कहा हम भी नही करते |
लेकिन ये सच है के मुहब्बत उन्हें भी है हमसे
इकरार वो भी नही करते इज़हार हम भी नही करते |

stranger216
23-09-2011, 02:59 PM
आये कुछ अब्र कुछ शराब आये
उसके बाद आये जो अज़ाब आये।


उम्र के हर वर्क पे दिल को नज़र
तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आये।


कर रहा था गम-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आये।


इस तरह अपनी खामोशी गूंजी
गोया हर सिम्त से जवाब आये।

stranger216
23-09-2011, 03:03 PM
किसको आती है मसीहाई किसे आवाज दूँ
बोल ए खूंखार तन्हाई किसे आवाज दूँ

चुप रहूँ तो हर नफ़स ड्सता है नागन की तरह
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ

उफ़ खामोशी की ये आहें दिल को भरमाती हुई
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज दूँ

stranger216
23-09-2011, 03:08 PM
अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शे़र फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं।

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।

आँखों में जो भर लोगे तो कांटो से चुभेंगे
ये ख़ाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं।

देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
मंदिर में फ़कत दीप जलाने के लिए हैं।

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
वरना तो बदन आग बुझाने के लिए हैं।

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए हैं।

stranger216
23-09-2011, 03:10 PM
कह दो इन हसरतों को कहीं और जा बसें,
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में।

उमर-ऐ-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में।

badboy123455
23-09-2011, 03:30 PM
कह दो इन हसरतों को कहीं और जा बसें,
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में।

उमर-ऐ-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में।

वाह वाह वाह 219096

jai 123
23-09-2011, 08:50 PM
मिला वो भी नही करते ,मिला हम भी नही करते
दगा वो भी नही करते ,दगा हम भी नही करते|
उन्हें रुसवाई का दुःख, हमें तन्हाई का डर
गीला वो भी नही करते शिकवा हम भी नही करते |
किसी मोड़ पे मुलाकात हो जाती है अक्सर
रुका वो भी नही करते ठहरा हम भी नहीं करते |
जब भी देखते हैं उन्हें सोचते हैं कुछ कहें उनसे
सुना वो भी नही करते कहा हम भी नही करते |
लेकिन ये सच है के मुहब्बत उन्हें भी है हमसे
इकरार वो भी नही करते इज़हार हम भी नही करते |बडा कनफ्युजन है भाई फिर भी बडिया है

badboy123455
23-09-2011, 09:56 PM
बडा कनफ्युजन है भाई फिर भी बडिया है



गहरी बात हे भाई............

aawara
24-09-2011, 12:05 AM
मेरे सजदों में कमी तो नहीं थी " फ़राज़"
क्या मुझ से भी बढ़ के किसी ने माँगा था उसको !!

Marcus Fenix
24-09-2011, 12:52 PM
Dr. Kumar Vishwas
हमारे वास्ते कोई दुआ मांगे, असर तो हो
हक़ीक़त में कहीं पर हो न हो आंखों मे घर तो हो
तुम्हारे प्यार की बातें सुनाते हैं ज़माने को
तुम्हें खबरों में रखते हैं, मगर तुमको खबर तो हो…

nabhesh
24-09-2011, 08:33 PM
मेरी आँखें अब तक खुली है सनम तेरे ही इंतजार में ,

जब की दफना कर चले गये लोग मुझे कब्रिस्तान में ''

badboy123455
24-09-2011, 10:15 PM
मेरी आँखें अब तक खुली है सनम तेरे ही इंतजार में ,

जब की दफना कर चले गये लोग मुझे कब्रिस्तान में ''



wah वाह वाह...........

arjun32
24-09-2011, 10:36 PM
हम भी पेश करेंगे एक......
पेश है.... वीरेन्द्र खरे 'अकेला' जी की एक ग़ज़ल....


आराम के, सुकून के राहत के चार दिन
या रब अता हों तेरी इनायत के चार दिन

अब ये न पूछ कैसे कटे हैं तेरे बग़ैर
कट ही गए हैं तेरी ज़रूरत के चार दिन

पगले तू ज़िन्दगी के किसी काम का नहीं
भारी पड़े हैं तुझको मुसीबत के चार दिन

मर्ज़ी किसी से वक़्त ने पूछी कहाँ कभी
किसको मिले हैं अपनी तबीयत के चार दिन

arjun32
24-09-2011, 10:38 PM
मुजरिम समझ के दे दे सज़ा या बरी ही कर
बहला न मुझको देके ज़मानत के चार दिन

दर्दों का दौर ख़त्म भी होगा, यक़ीन रख
होते कहाँ हैं एक सी सूरत के चार दिन

ये तो बता ‘अकेला’ जो गुज़रे सुकून से
ख़्वाबों के थे या थे वो हक़ीक़त के चार दिन

pathfinder
25-09-2011, 08:38 PM
सब के होंटो पे तबस्सुम था मेरे क़त्ल के बाद,
जाने क्या सोच कर रोता रहा क़ातिल मेरा...
मेरी जानकारी के अनुसार सही शेर कुछ इस तरह है |
सब के होठों पे तबस्सुम था मेरे क़त्ल के बाद,
जाने क्या सोच के रोता रहा क़ातिल तन्हा

pathfinder
25-09-2011, 08:41 PM
मैं जब उसकी याद मे खो सा जाता हूँ
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे |

pathfinder
25-09-2011, 08:42 PM
तुम मुखातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखूं के तुमसे बात करूं |
मुखातिब-सम्बोधित

arjun32
25-09-2011, 08:44 PM
हो सके तुझ से तो ऐ दोस्त! दुआ दे मुझको

तेरे काम आऊँ ये तौफ़ीक़ ख़ुदा दे मुझको


तेरी आवाज़ को सुनते ही पलट आऊँगा

हमनवा ! प्यार से इक बार सदा दे मुझको

arjun32
25-09-2011, 08:45 PM
तू ख़ता करने की फ़ितरत तो अता कर पहले

फिर जो आए तेरे जी में वो सज़ा दे मुझको

राख बेशक हूँ मगर मुझ में हरारत है अभी

जिसको जलने की तमन्ना हो हवा दे मुझको

fullmoon
25-09-2011, 10:37 PM
ज़िन्दगी तूनें मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं

पाँव फ़ैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

बशीर बद्र

fullmoon
25-09-2011, 10:37 PM
कोई हाथ भी न मिलायेगा, जो गले लगोगे तपाक से

ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो ।

fullmoon
25-09-2011, 10:38 PM
पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी,

आँखो को अभी ख्वाब छुपानें नहीं आते ।

fullmoon
25-09-2011, 10:39 PM
तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था.

फ़िर उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला ।

arjun32
25-09-2011, 10:47 PM
ज़िन्दगी तूनें मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं

पाँव फ़ैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

बशीर बद्र




बहुत सुंदर.... ला-जवाब .....

badboy123455
25-09-2011, 11:08 PM
ज़िन्दगी तूनें मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं

पाँव फ़ैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

बशीर बद्र





कोई हाथ भी न मिलायेगा, जो गले लगोगे तपाक से

ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो ।


तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था.

फ़िर उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला ।




वाह मज़ा आ गया
शानदार,बेहतरीन,जबर दस्त++++

badboy123455
25-09-2011, 11:15 PM
तुम मुखातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखूं के तुमसे बात करूं |
मुखातिब-सम्बोधित



मेरी जानकारी के अनुसार ......

तू मेरे सामने में तेरे सामने
तुजको देखू के प्यार करू http://dl.dropbox.com/u/42792164/Smiley%20Central%20Emoticons/Smiley%20Central%20Emoticon%20%2822%29.gif

pathfinder
26-09-2011, 08:19 AM
मेरी जानकारी के अनुसार ......

तू मेरे सामने में तेरे सामने
तुजको देखू के प्यार करू http://dl.dropbox.com/u/42792164/Smiley%20Central%20Emoticons/Smiley%20Central%20Emoticon%20%2822%29.gif
दोनों अशआर अलग अलग हैं ,मेरे द्वारा प्रस्तुत गया शेर शायद मिर्ज़ा ग़ालिब का है |

GOVIDAA
26-09-2011, 08:26 AM
मेरी जानकारी के अनुसार सही शेर कुछ इस तरह है |
सब के होठों पे तबस्सुम था मेरे क़त्ल के बाद,
जाने क्या सोच के रोता रहा क़ातिल तन्हा

बहुत अच्छा है .

badboy123455
26-09-2011, 05:28 PM
दोनों अशआर अलग अलग हैं ,मेरे द्वारा प्रस्तुत गया शेर शायद मिर्ज़ा ग़ालिब का है |



हा हा हा मेने तो दोनों का मतलब एक होने के कारण लिखा [वैसे ये एक गाना हे]
कोई गलती हो तो माफ़ी चाहूँगा

GOVIDAA
26-09-2011, 05:41 PM
समा गए मेरी नज़रों में छा गए दिल पर।
ख़याल करता हूँ, उनको कि देखता हूँ मैं॥

न कोई नाम है मेरा न कोई सूरत है।
कुछ इस तरह हमातनदीद हो गया हूं मैं॥

न कामयाब हुआ और न रह गया महरूम।
बडा़ ग़ज़ब है कि मंज़िल पै खो गया हूँ मैं

NaKShtR
26-09-2011, 05:43 PM
ग़मों ने घेर लिया है मुझे तो क्या ग़म है
मैं मुस्कुरा के जियूँगा तेरी ख़ुशी के लिये
कभी कभी तू मुझे याद कर तो लेती है
सुकून इतना सा काफ़ी है ज़िन्दगी के लिये

badboy123455
26-09-2011, 06:15 PM
हवा में ताश का घर नहीं बनता, रोने से बिगडे मुक़द्दर नहीं बनता
दुनिया जीतने का हौसला रखो ऐ दोस्तों, एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता

badboy123455
26-09-2011, 06:16 PM
दोस्ती तो एक अनमोल ताज़ होता हैं !
दोस्त को जिसपे नाज़ होता हैं !!
कृष्णा और सुदामा को देख कर पता चलता हैं !
की भगवान् भी दोस्ती का मोहताज़ हैं !!

badboy123455
26-09-2011, 06:17 PM
कुछ दोस्तों ने हमको भी मशहूर कर दिया !
गम में भी मुश्कुराने पर मजबूर कर दिया !!
आप भी सामिल हैं उन गिनती के लोगों में !
जिन्होंने हमें काँच से कोहिनूर कर दिया !!

badboy123455
26-09-2011, 06:17 PM
वो जो सर झुकाए बैठे हैं !
हमारा दिल चुराए बैठे हैं !!
हमने कहा हमारा दिल लौटा दो...!
उसने बोली, हम तो हाथो में मेहँदी लगाये बैठे हैं !!

badboy123455
26-09-2011, 06:19 PM
दर्द दिल का अब सहा नहीं जाता !
बिन तेरे अब रहा नहीं जाता !!
लोग कहते हैं बेवफा तुझको !
मुझसे ये भी कहा नहीं जाता !!

NaKShtR
26-09-2011, 09:05 PM
वो जो सर झुकाए बैठे हैं !
हमारा दिल चुराए बैठे हैं !!
हमने कहा हमारा दिल लौटा दो...!
उसने बोली, हम तो हाथो में मेहँदी लगाये बैठे हैं !!


दर्द दिल का अब सहा नहीं जाता !
बिन तेरे अब रहा नहीं जाता !!
लोग कहते हैं बेवफा तुझको !
मुझसे ये भी कहा नहीं जाता !!

बहुत खूब राकेश जी अच्छा है ............++ वाला

pathfinder
26-09-2011, 11:43 PM
जिन लोगों को उर्दू पढनी आती है उनके लिए एक शेर ,इसमें थोडा शब्दों का हेर फेर है |
एक नुक्ते ने मुझे मेहरम से मुजरिम कर दिया
मैं दुआ लिखता रहा वो दगा पढता गया |

fullmoon
26-09-2011, 11:58 PM
जिन लोगों को उर्दू पढनी आती है उनके लिए एक शेर ,इसमें थोडा शब्दों का हेर फेर है |
एक नुक्ते ने मुझे मेहरम से मुजरिम कर दिया
मैं दुआ लिखता रहा वो दगा पढता गया |

मुझे उर्दू पढनी तो नहीं आती,
पर हाँ इस शेर का मर्म मैं समझ गया हूँ,
काफी गहरा शेर है......

aawara
27-09-2011, 12:32 AM
जिन लोगों को उर्दू पढनी आती है उनके लिए एक शेर ,इसमें थोडा शब्दों का हेर फेर है |
एक नुक्ते ने मुझे मेहरम से मुजरिम कर दिया
मैं दुआ लिखता रहा वो दगा पढता गया |
सुभान-अल्लाह ............शानदार...........!!

aawara
27-09-2011, 02:00 AM
ये प्यार है के प्यार का अन्धा जुनून है !
जब-जब मिले निगाहों से गिरते चले गए !!

arjun32
27-09-2011, 06:29 AM
आने के वक़्त तुम तो कहीं के कहीं रहे
अब आये तुम तो फ़ायदा ? हम ही नहीं रहे
(मीर)

arjun32
27-09-2011, 06:38 AM
तेरी जुल्फें-सियाह की याद में आंसू झमकते हैं
अँधेरी रात है, बरसात है, जुगनू चमकते हैं

arjun32
27-09-2011, 06:46 AM
ग़म में दिल, सब्र, होश ऐ प्यारे
हाथ कानों पे रख गए सारे

arjun32
27-09-2011, 06:58 AM
जिन लोगों को उर्दू पढनी आती है उनके लिए एक शेर ,इसमें थोडा शब्दों का हेर फेर है |
एक नुक्ते ने मुझे मेहरम से मुजरिम कर दिया
मैं दुआ लिखता रहा वो दगा पढता गया |

बहुत सुंदर.... जैसे- 'नुक्ते के फेर में खुदा....... जुदा हुआ'.....

Pooja1990 QUEEN
27-09-2011, 12:36 PM
पाथ जी वाह वाह

badboy123455
27-09-2011, 12:53 PM
बहुत सुंदर.... जैसे- 'नुक्ते के फेर में खुदा....... जुदा हुआ'.....


अब तो में भी समझ गया...........http://antarvasna.com/forum/images/icons/icon6.png

just4fun
27-09-2011, 08:18 PM
आइना देख अपना सा मुह लेकर रह गए, साहब को दिल न देने पे कितना गुरुर था.

just4fun
27-09-2011, 08:20 PM
उजाले अपनी यादो के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये.

just4fun
27-09-2011, 08:21 PM
दिल दिया तेरे प्यार की हद थी,
जान दी eitbar की हद थी,
मर गए पर खुली रही आँखें,
ये तेरे इंतजार की हद थी.

arjun32
27-09-2011, 08:56 PM
पाथ जी वाह वाह

???? ???? ???? ????

aawara
28-09-2011, 02:55 AM
जिसे दुनिया कहा जाता है, कोठे की तवाइफ़ है |
इशारा किसको करती है, नजारा कौन करता है |

aawara
28-09-2011, 03:20 AM
"मुझे मालूम है माँ की दुआएं साथ चलती है
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है !!"

Sharma1989
28-09-2011, 03:33 AM
मैंने पूछा अपने खुदा से ,
क्यो मेरी दुआ उसी वक्त नहीं सुनता ।


तो खुदा ने मुस्कुरा कर कहा ,
"में तो तेरे गुनाहो की सज़ा भी उसी वक़्त नहीं देता "

NaKShtR
28-09-2011, 09:13 AM
तेरी सदा का है सदियों से इंतज़ार मुझे
मेरे लहू के समुन्दर जरा पुकार मुझे

मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ़ के क्या देखूं
उरूज-ए-फ़न मेरी दहलीज़ पर उतार मुझे

उबलते देखी है सूरज से मैंने तारीकी
न रास आएगी ये सुब्ह-ए-ज़रनिगार मुझे

कहेगा दिल तो मैं पत्थर के पाँव चूमूंगा
ज़माना लाख करे आ के संगसार मुझे

badboy123455
28-09-2011, 09:44 AM
आइना देख अपना सा मुह लेकर रह गए, साहब को दिल न देने पे कितना गुरुर था.




हा हा हा हा हा :rofl:

pathfinder
28-09-2011, 03:41 PM
एक मज़ाहिय्या (हास्य)शेर-
तुरबत पे न आना मेरी हमराहे रकीबा
मुर्दे को मुसलमान जलाया नहीं करते |

तुरबत-कब्र
ह्मराहे-साथ में
रकीबा -दुश्मन

pathfinder
28-09-2011, 04:00 PM
मैं तो गजल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए |

Kamal Ji
28-09-2011, 04:04 PM
एक मज़ाहिय्या (हास्य)शेर-
तुरबत पे न आना मेरी हमराहे रकीबा
मुर्दे को मुसलमान जलाया नहीं करते |

तुरबत-कब्र
ह्मराहे-साथ में
रकीबा -दुश्मन
नमस्कार सर
यह शेर मैंने ऐसा सुना था...........
आना न मेरी कब्र पे हमराहे रकीबा ,
मुर्दे को मुस्लमा जलाया नहीं करते .

julie.
28-09-2011, 04:06 PM
एक मज़ाहिय्या (हास्य)शेर-
तुरबत पे न आना मेरी हमराहे रकीबा
मुर्दे को मुसलमान जलाया नहीं करते |

तुरबत-कब्र
ह्मराहे-साथ में
रकीबा -दुश्मन

कुछ समझ में नहीं आया

Kamal Ji
28-09-2011, 04:10 PM
कुछ समझ में नहीं आया

यह बड़े लोगो की बातें है
आप चौपाल पर चलो बस.

Kamal Ji
28-09-2011, 04:11 PM
एक मज़ाहिय्या (हास्य)शेर-
तुरबत पे न आना मेरी हमराहे रकीबा
मुर्दे को मुसलमान जलाया नहीं करते |

तुरबत-कब्र
ह्मराहे-साथ में
रकीबा -दुश्मन
माफ़ी चाहती हूँ सर
मेरी हमराहे इस से तो अर्थ का अनर्थ हो जाएगा.........

julie.
28-09-2011, 04:14 PM
यह बड़े लोगो की बातें है
आप चौपाल पर चलो बस.

अच्छा आप बड़े लोगों में से एक हो

Kamal Ji
28-09-2011, 04:16 PM
अच्छा आप बड़े लोगों में से एक हो
अरे नही री......मैं बड़े लोगो के साथ खड़ी हूँ.

Kamal Ji
28-09-2011, 04:22 PM
अच्छा आप बड़े लोगों में से एक हो
यार अब चल चौपाल पर अब यह बातें वहीँ पर होंगी
मैं पम कर के इस शेर का अर्थ बता दूंगी.........

julie.
28-09-2011, 04:25 PM
अरे नही री......मैं बड़े लोगो के साथ खड़ी हूँ.

किस आधार पर और यहाँ कौन बड़ा है .............. पद के अनुसार या पुराने सदस्य के अनुसार या उम्र के अनुसार

Sharma1989
29-09-2011, 01:57 AM
कभी कभी प्यासे सबनम को तरस जाते है ,
वेसे तो लोग अक्सर फूलो से दोस्ती बनाते है ।
मगर फूल ही उन्हे ईस कदर कभी ठुकराते है ,
की फिर वो कांटे के चुभन को तरस जाते है।

Sharma1989
29-09-2011, 02:03 AM
सफर ज़िंदगी का कटे किस बहाने से ,
हमे सिवा गम के मिला कुछ नहीं जमाने से ।
ये ओर बात है की वक्त जुड़ा कर देता है,
वरना प्यार मिटता नहीं किसी के मिटाने से ।

NaKShtR
29-09-2011, 09:25 AM
तोड़ना टूटे हुये दिल का बुरा होता है|
जिस का कोई नहीं उस का तो ख़ुदा होता है|

माँग कर तुम से ख़ुशी लूँ मुझे मंज़ूर नहीं,
किस का माँगी हुई दौलत से भला होता है|

लोग नाहक किसी मजबूर को कहते हैं बुरा,
आदमी अच्छे हैं पर वक़्त बुरा होता है|

क्यों "मुनिर" अपनी तबाही का ये कैसा शिकवा,
जितना तक़दीर में लिखा है अदा होता है|

badboy123455
30-09-2011, 01:01 PM
उनकी एक नज़र को तरसते रहेंगे !
ये आँशु हर पल बरसते रहेंगे !!
कभी बीते थे कुछ पल उनके साथ !
बस यही सोचके हम हँसते रहेंगे !!

badboy123455
30-09-2011, 01:02 PM
चाहते थे उन्हें पर इज़हार न कर सके !
कट गई उम्र हम एकरार न कर सके !!
हमारी भी ये कैसी मज़बूरी थी.....
ज़ुबान तो थी पर इस्तेमाल न कर सके !!

badboy123455
30-09-2011, 01:03 PM
इंसान के कंधे पर इंसान जा रहा हैं !
कपड़े में लिपटा कुछ सामान जा रहा हैं !!
उसे मिली बेवफ़ाई प्यार में...
अब प्यार की तलास में शमशान जा रहा हैं !!

badboy123455
30-09-2011, 01:04 PM
चिरागों से न पूछो तेल कितना हैं !
साँसों से न पूछो बांकी खेल कितना हैं !!
पूछो कफ़न में लिपटे लाश से...!
ज़िन्दगी में गम, और कफ़न में चैन कितना हैं !!

NaKShtR
30-09-2011, 07:02 PM
इलाही ख़ैर वो हरदम नई बेदाद करते हैँ
हमेँ तोहमत लगाते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ

ये कह कहकर बसर की उम्र हमने क़ैदे उल्फत मेँ
वो अब आज़ाद करते हैँ वो अब आज़ाद करते हैँ

सितम ऐसा नहीँ देखा जफ़ा ऐसी नहीँ देखी
वो चुप रहने को कहते हैँ जो हम फरियाद करते हैँ

Noctis Lucis
30-09-2011, 07:10 PM
अलफ़ाज़ के झूठे बंधन में....
आगाज़ के गहरे पर्दों में .....
हर शख्स मुहब्बत करता है ...
हालाँ के मुहब्बत कुछ भी नही....
सब दिल रखने की बातें हैं ....
कब कौन किसी का होता है ...
सब असली रूप छुपाते हैं .......
अहसास से खाली लोग यहाँ ...
लफ्जों के तीर चलाते हैं .......
एक बार नजर में आकर वो .......
फिर सारी उमर रुलाते हैं .
यह इश्क ओ मुहब्बत महरो-वफा .......
ये सब कहने की बातें हैं ...
हर शख्स खुदी की मस्ती में ....
बस अपनी खातिर जीता है ?...

NaKShtR
30-09-2011, 07:14 PM
अलफ़ाज़ के झूठे बंधन में....
आगाज़ के गहरे पर्दों में .....
हर शख्स मुहब्बत करता है ...
हालाँ के मुहब्बत कुछ भी नही....
सब दिल रखने की बातें हैं ....
कब कौन किसी का होता है ...
सब असली रूप छुपाते हैं .......
अहसास से खाली लोग यहाँ ...
लफ्जों के तीर चलाते हैं .......
एक बार नजर में आकर वो .......
फिर सारी उमर रुलाते हैं .
यह इश्क ओ मुहब्बत महरो-वफा .......
ये सब कहने की बातें हैं ...
हर शख्स खुदी की मस्ती में ....
बस अपनी खातिर जीता है ?...




बहुत खूब साजिद जी ......................

Noctis Lucis
30-09-2011, 07:17 PM
आज मुड बहुत खराब है

Noctis Lucis
30-09-2011, 08:53 PM
वो मेरे अलफ़ाज़ से हैरान रहता था ...
मै उस के जौक से परेशान रहता था ...
बेवफा तो कह दिया था, सरेआम उसने ...
फिर न जाने क्यूँ खुद ही, पशेमान रहता था ..
सुना है के पूछा था, किसी ने मेरे बारे में उससे...
कहा उस ने के हाँ, दिल में एक नादान रहता था ....
हम कैसे उस की रुसवाई करें साजिद
जिस पर कभी हमारा ईमान रहता था ...

Ranveer
30-09-2011, 11:20 PM
आज मुड बहुत खराब है

हा हा हा
यार , मूड खराब रहने पर इतनी अच्छी शायरी करते हो ...सोचो :pointlol:

Ranveer
30-09-2011, 11:27 PM
मेरे सजदों में कमी तो नहीं थी " फ़राज़"
क्या मुझ से भी बढ़ के किसी ने माँगा था उसको !!

बहुत खूब ...लाजवाब |

Ranveer
30-09-2011, 11:35 PM
मेने उससे कहा .............
छोड़ दो या तोड़ दो मुझे ...

उसने हंस कर मुझे गले लगाया ओर कहा
छोड़ रही हु आज तुम्हें
टूट तो तुम खुद जाओगे ..................

पत्थर तो बहुत मारे थे लोगों ने मुझे , लेकिन
जो दिल पर लगा आके ,वो एक दोस्त ने मारा था |

Noctis Lucis
01-10-2011, 10:30 AM
ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है... :nono:
मलाल है ,मगर इतना मलाल थोड़ी है .....

बस अपने वास्ते है फ़िक्र मंद सब लोग ...
यहाँ किसी को किसी का ख्याल थोड़ी है .....

परों को काट दिया उड़ान से पहले ...
ये खौफ -ए -हिज्र है ,शौक -ए - विसाल थोड़ी है .....

मज़ा तो जब है के हार के भी हंसते रहो ...
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है .....

लगानी पडती है डुबकी उभरने से पहले ...
गरूब होने का मतलब ज़वाल थोड़ी है .....

Dark Rider
01-10-2011, 10:50 AM
सोच सोचकर उम्र क्यूं कम करूं
वो नही मिला तो क्यूं गम करूं
ना हुआ ना सही दीदार उनका
किसलिए भला आँखे नम करूं
सोचता हूँ लिख डालु विरासत
उसके नाम भी कुछ नज्म करूं
हद हो गई फल के इंतजार की
कितने दिन और अब कर्म करूं
अब नही सुहाती इश्क की बातें
वो मिले तो किस्सा खत्म करूं
महबूब के कपड़ो की कंगाली पर
बता तो बेचैन कितनी शर्म करू

Lofar
01-10-2011, 06:17 PM
मौला ये तमन्ना है कि जब जान से जाऊँ,
जिस शान से आया हूँ उसी शान से जाऊँ

बच्चों की तरह पेड़ों की शाख़ों से मैं कूदूँ,
चिड़ियों की तरह उड़के मैं खलिहान से जाऊँ

हर लफ़्ज़ महकने लगे लिक्खा हुआ मेरा,
मैं लिपटा हुआ यादों के लोबान से जाऊँ

मुझमें कोई वीराना भी आबाद है शायद,
साँसों ने भी पूछा था बियाबान से जाऊँ

ज़िंदा मुझे देखेगी तो माँ चीख उठेगी,
क्या ज़ख़्म लिए पीठ पे मैदान से जाऊँ

क्या सूखे हुए फूल की क़िस्मत का भरोसा,
मालूम नहीं कब तेरे गुलदान से जाऊँ......

Sharma1989
02-10-2011, 03:32 AM
जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका,


हम ईबादत करते करते फकीर हो गए ।

Sharma1989
02-10-2011, 03:46 AM
कोई रिस्ता टूट जाए , दुख तो होता है
अपने हो जाए पराये , दुख तो होता है
माना हम नहीं है प्यार के काबिल , पर
कोई ऐसे ठुकराए , दुख तो होता है

Dark Rider
02-10-2011, 09:00 AM
फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह

शीशागर बैठे रहे ज़िक्र-ए-मसीहा लेकर
और हम टूट गये काँच के प्यालों की तरह

जब भी अंजाम-ए-मुहब्बत ने पुकार ख़ुद को
वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह

ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आयेंगे दुनिया को हवालों की तरह

bhooooljaa
02-10-2011, 09:01 AM
क्योँ सच का सबक सिखाये..
जब सच भी सुन ना पाये..!
जब कोई सच बोले तब तू नियम कानून बताये....
तेरा डर...... तेरा प्यार....... तेरी वाह........
तू ही रख..
साड्डा हक इत्थे रख.....!!!
साड्डा हक इत्थे रख.....!!!

Lofar
02-10-2011, 10:20 AM
कुछ तन्हाई के पल , कुछ ग़मों के साये हैं

भुलाने के लिए उन्हें हमने, कुछ नगमें गुनगुनाये हैं

हर पल है साथ उनका ,फिर अक्स बनके आँखों में उतर आये

देखकर कर उन्हें शायद हम, काफी दिनों बाद मुस्कुराए हैं

Ranveer
02-10-2011, 04:38 PM
कौन किसे यादों में जगह देता है
पेड भी सूखे पत्ते गिरा देता है
वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजों से
दिल भर जाए तो हर कोई भुला देता है |

sultania
02-10-2011, 04:41 PM
कौन किसे यादों में जगह देता है
पेड भी सूखे पत्ते गिरा देता है
वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजों से
दिल भर जाए तो हर कोई भुला देता है |

वाह वाह ............

Ranveer
02-10-2011, 05:02 PM
वाह वाह ............


घर से मस्जिद है बहुत दूर ,
चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को
हँसाया जाए

जिन चिरागों को
हवाओं का कोई खौफ नहीं
उन चिरागों को
हवाओं से बचाया जाए ||

MALLIKA
02-10-2011, 05:32 PM
आंसू ना होते तो आंखे इतनी खुबसूरत ना होती ,

दर्द ना होता तो ख़ुशी की कीमत ना होती !

पूरी करता खुदा सब मुरादें ,

तो इबादत की कभी ज़रूरत ना होती !

Rajeev
02-10-2011, 05:57 PM
फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह

शीशागर बैठे रहे ज़िक्र-ए-मसीहा लेकर
और हम टूट गये काँच के प्यालों की तरह

जब भी अंजाम-ए-मुहब्बत ने पुकार ख़ुद को
वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह

ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आयेंगे दुनिया को हवालों की तरह
वाह क्या शेर फ़रमाया है मनोज जी, The White Hat Hacker जी की बात लगता है !
सही हो रही है आप जब से आये हो तब से बदले बदले लग रहे हो, कही दिल का चक्कर तो नहीं है न !

aawara
02-10-2011, 06:09 PM
पूरी करता खुदा सब मुरादें ,

तो इबादत की कभी ज़रूरत ना होती !


आस्था का जिस्म घायल रूह तक बेज़ार है !

क्या करे कोई दुआ जब देवता बीमार है !!

Ranveer
02-10-2011, 09:29 PM
सोच सोचकर उम्र क्यूं कम करूं
वो नही मिला तो क्यूं गम करूं
ना हुआ ना सही दीदार उनका
किसलिए भला आँखे नम करूं
सोचता हूँ लिख डालु विरासत
उसके नाम भी कुछ नज्म करूं
हद हो गई फल के इंतजार की
कितने दिन और अब कर्म करूं
अब नही सुहाती इश्क की बातें
वो मिले तो किस्सा खत्म करूं
महबूब के कपड़ो की कंगाली पर
बता तो बेचैन कितनी शर्म करू
घंटी लाल !!
फ़िक्र न करो , बाजार में मुहब्बत की कीमत बहुत कम है , आसानी से मिल जायेगी |:pointlol:

Ranveer
02-10-2011, 10:14 PM
कोई मेरी हस्ती का माकूल मोल लगाए तो सही
मुझे तुम्हारी जिंदगी का हर दुःख खरीदना है |

pathfinder
03-10-2011, 09:38 AM
और तो कुछ खुदा से दरकार नहीं है मुझको
मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे |

pathfinder
03-10-2011, 09:39 AM
इक सर निकोह सी टैह्नी रख लेंगे चार तिनके
न बुलंद शाख होगी न गिरेगा आशियाना |

pathfinder
03-10-2011, 09:41 AM
हमारी आँखों में आओ के हम दिखाए तुम्हें
अदा तुम्हारी के तुम भी कहो के "हाँ कुछ है"

Akash78
03-10-2011, 10:01 AM
हजार रंजो-मुसीबत के दिन गुजारे है ,
कभी जो लड़ गई किस्मत तो वारे-न्यारे है !
खुदा की शाने-करीमी का पूछना क्या है ,
गजब तो ये है ,गुनाहगार हम तुम्हारे है !!दाग !!

Akash78
03-10-2011, 10:04 AM
तुमको चाहां तो खता क्या है ,बता दो मुझको ,
दूसरा कोई तो अपना-सा दिखा दे मुझको !
कौन होता है कड़ी बात का सहने वाला ,
गालियाँ तुमको सिखा दी ,ये दुआ दो मुझको !!मिर्ज़ा दाग !!

Akash78
03-10-2011, 10:09 AM
मैंने चाहा तुम्हे उसका गुनाहगार तो हूँ ,
मगर इतना भी समझ लो की वफादार तो हूँ ,
उम्र भर आपने मुझको कभी अच्छा न कहाँ ,
खैर अच्छा न सही ,आपका बीमार तो हूँ !!दाग !!

badboy123455
03-10-2011, 07:53 PM
आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!

badboy123455
03-10-2011, 07:54 PM
दिन तेरे ख़याल में गुजर जाता हैं !
रातों को भी ख़याल तेरा ही आता हैं !!
कभी ये ख़याल इस तरह बढ़ जाता है की !
आयने में भी तेरा ही चेहरा नज़र आता हैं !!

badboy123455
03-10-2011, 07:55 PM
एक लम्हे में कटा उम्र भर का फासला,
मैं अभी आया हूँ तस्वीरें पुरानी देखकर।

badboy123455
03-10-2011, 07:55 PM
ज़िंदगी में मेरी ये हादसा तो होना ही था,
उसे कभी ना कभी तो बेवफा होना ही था।

badboy123455
03-10-2011, 07:56 PM
मंज़र तुम्हारे शहर के जब याद आएँगे,


दिल पर लगेगी चोट मगर मुस्कुराएँगे।

badboy123455
03-10-2011, 07:57 PM
ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है,




यकीनन कल कोई त्योहार होगा

badboy123455
03-10-2011, 07:58 PM
यूँ तो सारी उम्र गुज़री यार अपनी दरबदर,





हाँ जो तेरे साथ गुज़रा वो सफर अच्छा लगा।

badboy123455
03-10-2011, 07:59 PM
कैसे कहूँ कि दिल को तेरी आरज़ू नहीं,




ये और बात है कि मेरी किस्मत में तू नहीं।

badboy123455
03-10-2011, 08:00 PM
लबों पे आह दिल में दर्द और आँख में पानी है,




मुहब्बत करने वालों की बस इतनी-सी कहानी है।

badboy123455
03-10-2011, 08:01 PM
नज़रों से नज़रे मिला कर चल दिये !
वो हुस्न-ई-नूर से जाम पिला कर चल दिये !!
पूछा जो हमने चाँद निकलता हैं कैसे ?!
वो चेहरे से झुल्फे हटा कर चल दिये !!

badboy123455
03-10-2011, 08:02 PM
उनकी तस्वीर को सिने से लगा लेते हैं !
इस तरह जुदाई का गम मिटा देते हैं !!
किसी तरह कभी उनका जिक्र हो जाये तो !
भींगी पलकों को हम झुका लेते हैं !!

badboy123455
03-10-2011, 08:03 PM
दोस्त कह कर दोस्त से दगा कर बैठा !
वो आज एक ऐसा खता कर बैठा !!
कहता था तुझे कभी हम खपा ना होने देगे !
आज वो खुद ही हमें खपा कर बैठा !!
आदत थी उसे सबोके गमो को दूर करने की लेकिन !
हमारे लिए ही वो गमो की दुआ कर बैठा !!

Noctis Lucis
04-10-2011, 06:33 PM
कल रात मेरे बिस्तर पर
एक आहट ने चौंका दिया
फिर एक गर्म हवा का झोंका
मेरे पेशानी को छू गया
आँख खुली तो माँ को देखा
कुछ हिलते लब ,कुछ पढते लब
मै धीरे से मुस्कुरा दिया

माँ आज भी उठ कर रातों में
मेरी पेशानी को चूमती है
और अपने हिस्से की भी सब दुआएं
मुझ पर फूंका करती है

मैंने अपने बचपन में
बस एक बार कहा था
"माँ " मुझे डर लगता है
"माँ " मुझे नींद नही आती

Noctis Lucis
04-10-2011, 06:40 PM
खामोश हैं हम तो मगरूर समझ लिया
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया |

यहीं तो आप से गलती हुयी
इतने करीब थे हम फिर भी दूर समझ लिया |

monieda
04-10-2011, 10:14 PM
'ग़ालिब' छुटी शराब पर अब भी कभी-कभी
पीता हूँ रोज़-ए-अब्र और शब्-ए-माहताब में
-------------------- ग़ालिब
(रोज़-ए-अब्र - घटा के दिन | शब्-ए-माहताब - चांदनी रात)

monieda
04-10-2011, 10:16 PM
यकीनन आ गया है मयकदे में तिश्नालब कोई
की पीता जा रहा हूँ कैफियत कम होती जाती है
------------------ वामिक जौनपुरी
(तिश्नालब - प्यासा | कैफियत - असर )

monieda
04-10-2011, 10:17 PM
तमाम रात तेरी आँख का ख़याल बखैर
लबों से जाम लगा कर गुज़ार दी मैंने
----------------- वसीम बरेलवी

monieda
04-10-2011, 10:19 PM
रात का इन्तिज़ार कौन करे,
आज कल दिन में क्या नहीं होता
---------------- बशीर बद्र

monieda
05-10-2011, 10:11 PM
मैं पी रहा हूँ कि पीना इन्हें अज़ाब नहीं
ये मेरे अश्क हैं साकी ! तेरी शराब नहीं
------------- वसीम बरेलवी
अज़ाब - पाप

monieda
05-10-2011, 10:12 PM
जिसे खिरद की जुबाँ में शराब कहते हैं
वो रोशनी सी पिलाओ बड़ा अन्धेरा है
-------------- फ़िराक
खिरद - अकल

monieda
05-10-2011, 10:12 PM
न तुम होश में हो न हम होश में हैं
चलो मयकदे में , वहीं बात होगी
--------------- बशीर बद्र

monieda
05-10-2011, 10:13 PM
मुझ जैसे रिन्द को भी तूने हश्र में, यारब !
बुला ही लिया है तो कुछ इन्तिज़ाम हो जाए
-------------- नरेश कुमार शाद
रिन्द - शराबी | हश्र - हिसाब का दिन

badboy123455
06-10-2011, 06:01 PM
मुझ जैसे रिन्द को भी तूने हश्र में, यारब !
बुला ही लिया है तो कुछ इन्तिज़ाम हो जाए
-------------- नरेश कुमार शाद
रिन्द - शराबी | हश्र - हिसाब का दिन


क्या बात हे रेपो इस शेर पर ...........

monieda
06-10-2011, 08:43 PM
तेरे हाथ से मेरे होंठ तक, वो ही इन्तिज़ार की प्यास थी
मेरे नाम की जो शराब थी, कहीं रास्ते में छलक गयी
------------- बशीर बद्र

monieda
06-10-2011, 08:44 PM
जान कर मिनजुम्ला-ए-खासाने-मयखाना मुझे
मुद्दतों रोया करेंगे जाम-ओ-पैमाना मुझे
------------------ ज़िगर
मिनजुम्ला-ए-खासाने-मयखाना - शराबखाने का ख़ास मेहमान

monieda
06-10-2011, 08:44 PM
आज तो तल्खी-ए-दौराँ भी बहुत हल्की है
घोल दो हिज्र की रातों को भी पैमानों में
-------------- मखदूम
तल्खी-ए-दौराँ - सांसारिक कडवाहट | हिज्र - विरह |

monieda
06-10-2011, 08:45 PM
हम खुदा के कभी काइल ही न थे
उनको देखा तो खुदा याद आया
-------------- मीर
काइल - मानने वाले |

Parbat
07-10-2011, 12:06 AM
पत्थर सुलग रहे थे.
नक़्शे पाँव ना था.

जिस तफर हम चले थे.
कोई रास्ता न था.

Parbat
07-10-2011, 12:07 AM
जस्बा अ दिल जिस दिन सरफरोशी में जान लेवा बनेगा.

अपने सर पे ज़ख्मो का सेहरा सजा के तेरा दीवाना दूल्हा बनेगा.

Parbat
07-10-2011, 12:08 AM
मून जी,

क्या इस सूत्र में सिर्फ महान शायरों की ही शय्रारी प्रस्तुत हो?

या किसी तुच्छ शायर की भी की जा सकती है???

Parbat
07-10-2011, 12:10 AM
आईने से कब तलक तुम अपना दिल बहलाओगे,
छाएंगे जब जब अँधेरे, खुद को तनहा पाओगे.

हर हसीं मंज़र से यारो फासले कायम रखो,
चाँद अगर धरती पे उतरा, देख कर दर जाओगे,

आरजू, अरमान, ख्वाइश, जुस्तजू, वादे, वफ़ा,
दिल लगा के तुम ज़माने भर के धोखे खाओगे.

nitin9935
07-10-2011, 12:24 AM
क्या बात है परबत जी बड़े बेहतरीन शेर हैं
आईने से कब तलक तुम अपना दिल बहलाओगे,
छाएंगे जब जब अँधेरे, खुद को तनहा पाओगे.

हर हसीं मंज़र से यारो फासले कायम रखो,
चाँद अगर धरती पे उतरा, देख कर दर जाओगे,

आरजू, अरमान, ख्वाइश, जुस्तजू, वादे, वफ़ा,
दिल लगा के तुम ज़माने भर के धोखे खाओगे.

fullmoon
07-10-2011, 12:44 AM
एक लम्हे में कटा उम्र भर का फासला,
मैं अभी आया हूँ तस्वीरें पुरानी देखकर।

BAD जी,

खूबसूरत शेर..

आप के इस शेर से मुझे मेरी प्रिय फिल्म "तुम बिन" के एक गीत की कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी...

"एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़र,

ज़िन्दगी तेज़,बहुत तेज़ चली हो जैसे...."

fullmoon
07-10-2011, 12:51 AM
कल रात मेरे बिस्तर पर
एक आहट ने चौंका दिया
फिर एक गर्म हवा का झोंका
मेरे पेशानी को छू गया
आँख खुली तो माँ को देखा
कुछ हिलते लब ,कुछ पढते लब
मै धीरे से मुस्कुरा दिया

माँ आज भी उठ कर रातों में
मेरी पेशानी को चूमती है
और अपने हिस्से की भी सब दुआएं
मुझ पर फूंका करती है

मैंने अपने बचपन में
बस एक बार कहा था
"माँ " मुझे डर लगता है
"माँ " मुझे नींद नही आती


खामोश हैं हम तो मगरूर समझ लिया
चुप हैं हम तो मजबूर समझ लिया |

यहीं तो आप से गलती हुयी
इतने करीब थे हम फिर भी दूर समझ लिया |


साजिद भाई,

आपने फिर से लिखना शुरू कर दिया,ये देखकर अच्छा लग रहा है.

अपने अल्फाजों को आप बहुत ही खूबसूरती से पिरोते हैं.....

REPUTATION ,REPUTATION ,REPUTATION .....(अगर तीन बार दे पाता तो,फिलहाल एक बार ही लीजिये)

badboy123455
07-10-2011, 05:13 PM
जस्बा अ दिल जिस दिन सरफरोशी में जान लेवा बनेगा.

अपने सर पे ज़ख्मो का सेहरा सजा के तेरा दीवाना दूल्हा बनेगा.



लाजवाब प्रस्तुति रेपो+

मून जी,

क्या इस सूत्र में सिर्फ महान शायरों की ही शय्रारी प्रस्तुत हो?

या किसी तुच्छ शायर की भी की जा सकती है???

हाहा हा:rofl::rofl:
इसका जवाब तो मून जी ही बतायेगे

fullmoon
07-10-2011, 05:39 PM
जब तक कांटों के साथ था
गुलाब जिंदा रहा
अलग हुआ तो मुरझा गया,

वह चिराग क्या अपना दर्द बयान करे
जिसको जलाने वाला ही बुझा गया।

fullmoon
07-10-2011, 05:43 PM
उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम

उसके ग़मो को हंसीं से सजा रहे थे हम

जलाया उसी दिए ने मेरा हाथ

जिसकी लौ को हवा से बचा रहे थे हम

love at night
07-10-2011, 05:44 PM
जब तक कांटों के साथ था
गुलाब जिंदा रहा
अलग हुआ तो मुरझा गया,

वह चिराग क्या अपना दर्द बयान करे
जिसको जलाने वाला ही बुझा गया।

मस्त है मून जी बहुत उम्दा , लाइफ देखि है फूलो की इस तरह से

fullmoon
07-10-2011, 05:45 PM
“अपने दिल की सूनी अफवाहों से काम ना ले

मुझै याद रख बेशक मेरा नाम ना ले

तेरा बहम है के मैं भूला दूंगा तुझे

मेरी कोई ऐसी सांस नहीं जो तेरा नाम न ले ”

fullmoon
07-10-2011, 05:47 PM
“ओस की बूंदे है, आंख में नमी है,

ना उपर आसमां है ना नीचे जमीन है

ये कैसा मोड है ज़िन्दगी का

जो लोग खास है उनकी ही कमी हैं ”

love at night
07-10-2011, 05:50 PM
“ओस की बूंदे है, आंख में नमी है,

ना उपर आसमां है ना नीचे जमीन है

ये कैसा मोड है ज़िन्दगी का

जो लोग खास है उनकी ही कमी हैं ”


रुलाओगे मून जी ........................................

fullmoon
07-10-2011, 05:54 PM
रुलाओगे मून जी ........................................

आज ऐसा ही कुछ मूड हो रहा है.
कुछ आप भी लिखिए....