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Thread: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

  1. #1
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    पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    रावण स्व्यम एक महान तांत्रिक ओर उदारवादी राजा था उसके राज्य मैं प्रजा सबसे अधिक स्मृध थी ,,पूरी लंका ही सोने की बनी थी उसी से वहा के निवासियों की प्र्भुतता का अनुमान किया जा सकता है । तंत्र मंत्र के स्वामी रावण ने अपने खुद को प्रसन्न कर रावण की विशेष कृपा (यश वेभव ,सिद्धि प्राप्ति ) के लिये
    "क्रियोड्डीश तंत्रम"
    मैं ये मंत्र लिखा है कहा जाता है की इस मंत्र के जाप से पृथ्वी के सबसे ताकतवर तांत्रिक रावण प्रसन्न हो जाते है ।

  2. #2
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    " लां लां लां लंकाधिपतये लीं लीं लीं लंकेशं लूं लूं लूं लोल जिह्वां, शीघ्रं आगच्छ आगच्छ चंद्रहास खङेन मम शत्रुन विदारय विदारय मारय मारय काटय काटय हूं फ़ट स्वाहा "

    सावधान

    • यह एक अति उग्र मंत्र है.
    • कमजोर दिल वाले तथा बच्चे और महिलायें इस मंत्र को न करें.
    • अपने गुरु से अनुमति लेकर ही इस साधना को करें.
    • साधना काल में भयानक अनुभव हो सकते हैं.


    • दक्षिण दिशा में देखते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाकर जाप करना है.
    • २१००० मंत्र जाप रात्रि काल में करें.
    • २१०० मंत्र से हवन करें.



    • बिना डरे जाप पूर्ण करें.
    • दशानन रावण की कृपा प्राप्ति होगी.

  3. #3
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।


  4. #4
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    शिव की कृपा पाने के लिये साधारण जनमानस के लिये रावण ने "क्रियोड्डीश तंत्रम".मैं शिव तांडव स्तोत्र लिखा है । शिव तांडव स्तोत्र का ही पाठ करना सर्वथा उचित है ,,इस के पाठ से शिव की कृपा निश्चय ही मिलती है । ओर सावन के महीने मैं ये पाठ करना तो सोने पे सुहागा है ॥

  5. #5
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    जब रोगी को कोई ओषधि काम नहीं करे ,,इसके लिये रावण ने खुद उड्डीस तंत्र मैं इस मंत्र को लिखा है ,,इससे पानी मैं शक्ति आती है ओर इस पानी के सेवन पश्चात ओषधि लेने से ओषधि काफी अच्छी तरह से रोगी को फायदा पहुचाती है ------------
    मंत्र-----------------

  6. #6
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    सं सां सिं सीं सुं सूं सें सैं सों सौं सं स: वं वां विं वीं वुं वूं वें वैं वों वौं वं व: हं स: अमृतकार्यसे स्वाहा।

    रावण दुवारा रचित इस मंत्र को प्राणो का रक्षक माना गया है ,,सुबह दक्षिण की ओर मुह करके ताँबे के पात्र मैं जल लेके इस मंत्र का 108 बार उच्चार्ण कर अभिमंत्रित जल के सेवन से कठिन शारीरिक व्याधि दूर होने मैं अचूक मदद मिलती है ।

  7. #7
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    वेदों के संरक्षण की दिशा में रावण का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। रावण ने ही कृष्ण यजुर्वेद से लेकर वेदों की यत्र-तत्र फैली ऋचाओं को पहले तो एकत्रित किया और फिर क्रमबद्ध कर उन्हें संपादित कर ''ऋग्वेद'' नाम दिया। संस्कृत साहित्य के अधिकृत विद्वान वाचस्पति गैरोला ने अपनी पुस्तक ''संस्कृत साहित्य का इतिहास'' में लिखा है, शिव स्रोत, कृष्ण यजुर्वेद का भाष्य, ऋग्वेदीय पद पाठ आदि रावण द्वारा रचित व संपादित धार्मिक रचनाएं हैं। यह भी पता चला है कि रावण ने माध्यन्द्रिन संहिता पर भी भाष्य लिखा था और सस्वर वेद पाठ की प्रणाली का प्रचलन भी रावण ने ही शुरू किया था। इसीलिए तुलसीदास के''रामचरित मानस'' में हनुमान जब सीता की खोज के सिलसिले में लंका में प्रवेश करते हैं तो उन्हें वहां के शिव मंदिरों में वेदों की ऋचाओं के स्वर गूंजते सुनाई देते हैं।
    डा. कामिल बुल्के ने अपनी पुस्तक ''राम कथा उतपत्ति और विकास'' में लिखा है, संस्कृत हस्तलिपियों की सूची में रावण के नाम बहुत ही अर्वाचीन रचनाओं, जैसे अंक प्रकाश, वेद, कुमार तंत्र वैद्यक, इन्द्रजाल उड्डीसतंत्र,प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावण भेंट, यजुर्वेद, रावण संहिता का उल्लेख है। हालांकि अज्ञानता के पर्दे तो हमारी आंखों पर आज भी पड़े हुए हैं, जो हम महापंडित रावण को केवल राक्षसीय स्वरूप में देखने के आदी हो गए हैं और लकीरें पीटते चले आ रहे हैं।

  8. #8
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।

    मंत्र ही नहीं संगीत के भी रचीयता थे रावण



    रावण हत्था / रावण हस्त वीणा या रावणास्त्रम / Ravanastronरावण हत्था प्रमुख रूप से राजस्थान और गुजरात में प्रयोग में लाया जाता रहा है। यह राजस्थान का एक लोक वाद्य है। पौराणिक साहित्य और हिन्दू परम्परा की मान्यता है कि ईसा से 3000 वर्ष पूर्व लंका के राजा रावण ने इसका आविष्कार किया था और आज भी यह चलन में है। रावण के ही नाम पर इसे रावण हत्था या रावण हस्त वीणा कहा जाता है। यह संभव है कि वर्तमान में इसका रूप कुछ बदल गया हो लेकिन इसे देखकर ऐसा लगता नहीं है। कुछ लेखकों द्वारा इसे वायलिन का पूर्वज भी माना जाता है।
    इसे धनुष जैसी मींड़ और लगभग डेढ़-दो इंच व्यास वाले बाँस से बनाया जाता है। एक अधकटी सूखी लौकी या नारियल के खोल पर पशुचर्म अथवा साँप के केंचुली को मँढ़ कर एक से चार संख्या में तार खींच कर बाँस के लगभग समानान्तर बाँधे जाते हैं। यह मधुर ध्वनि उत्पन्न करता है।




  9. #9
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    Re: पृथ्वी के सबसे बड़े तांत्रिक रावण दुवारा रचित अचूक मंत्र ----सिर्फ जानकारी हेतु --उपयोग मैं लाने के पहले आवश्यक जानकारी ले ले ।


  10. #10
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